
4 Indians killed in Ukraine ship attack
MV Golden Leo Attack: रूस-यूक्रेन युद्ध का साया अब भारतीय परिवारों के घरों तक पहुंच चुका है। यूक्रेन के ओडेसा (Odesa) बंदरगाह से मकई (Corn) लादकर रवाना हो रहे एक वाणिज्यिक पोत 'एमवी गोल्डन लियो' (MV Golden Leo) पर हुए घातक मिसाइल हमले में 4 भारतीय नाविकों की दर्दनाक मौत हो गई। इस जहाज पर कुल 17 क्रू मेंबर सवार थे, जिनमें 5 भारतीय शामिल थे। हादसे में गंभीर रूप से घायल एक अन्य भारतीय नाविक का अस्पताल में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष जारी है।
इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए भारत सरकार ने नई दिल्ली में रूसी राजनयिक को समन जारी कर अपनी गहरी आपत्ति दर्ज कराई है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों और आम नागरिकों को निशाना बनाना पूरी तरह से अस्वीकार्य और निंदनीय है।
इस त्रासदी की सबसे दर्दनाक तस्वीर केरल के कासरगोड से सामने आई है। मृत नाविकों में से एक की पहचान 26 वर्षीय मर्चेंट नेवी ऑफिसर अखिल जोयन के रूप में हुई है।
अखिल हाल ही में छुट्टी पर घर आए थे, जहां उनकी सगाई हुई थी। नई जिंदगी के सपने आँखों में सजाकर वे महज एक महीने पहले ही वापस ड्यूटी पर लौटे थे। सोमवार को शिपिंग कंपनी के एक ईमेल ने उनके परिवार की खुशियों को पलभर में मातम में बदल दिया।
यूक्रेनी अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह हमला ब्लैक सी (Black Sea) के पास एक मिसाइल स्ट्राइक के जरिए अंजाम दिया गया, जिसमें कुल 10 लोगों की जान चली गई।
यह घटना दर्शाती है कि युद्धग्रस्त क्षेत्रों में मर्चेंट नेवी के जवान किस तरह अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं:
फ्रीडम ऑफ नेविगेशन पर खतरा: वाणिज्यिक जहाजों पर हमले से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो रही है।
पहले भी हुए हैं हादसे: यह पहला मौका नहीं है जब ब्लैक सी में कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाया गया है। युद्ध शुरू होने के बाद से ही ओडेसा और आसपास के बंदरगाहों पर कई विदेशी जहाजों पर हमले हो चुके हैं।
अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन: जेनेवा कन्वेंशन और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत युद्ध के दौरान भी गैर-सैन्य वाणिज्यिक जहाजों और असैन्य नागरिकों पर हमले प्रतिबंधित हैं।
भारत ने अब तक रूस-यूक्रेन विवाद में तटस्थ रुख बनाए रखा है और हमेशा संवाद तथा कूटनीति के जरिए समाधान की वकालत की है। हालांकि, अपने नागरिकों की जान जाने पर भारत ने बेहद सख्त लहजा अपनाया है।
"हमारी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास स्थिति पर लगातार नज़र बनाए हुए है और घायलों व मृतकों के परिजनों को हर संभव सहायता पहुँचाने में जुटा है।"
इस कड़े कदम से साफ है कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के मुद्दे पर किसी भी देश के साथ कोई समझौता करने के मूड में नहीं है। दुनिया भर की नज़रें अब इस बात पर टिकी हैं कि इस कूटनीतिक समन के बाद मास्को की ओर से क्या आधिकारिक सफाई आती है।
Updated on:
21 Jul 2026 11:22 am
Published on:
21 Jul 2026 10:56 am
