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पांच साल में 90 हजार हेक्टेयर जंगल खत्म, सबसे अधिक इसके के लिए ली गई वन भूमि

पिछले पांच साल में करीब 90 हजार हेक्टेयर वन भूमि विकास कार्यों की भेंट चढ़ गई। साल 1980 में वन संरक्षण अधिनियम बनने के बाद से अब तक देशभर में 10 लाख 26 हजार हेक्टेयर वन भूमि का गैर वनीय उपयोग के लिए डायवर्जन हुआ।

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देश में पिछले पांच साल में करीब 90 हजार हेक्टेयर वन भूमि विकास कार्यों की भेंट चढ़ गई। लोकसभा में पेश किए आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल, 2018 से मार्च, 2023 के बीच सबसे अधिक वन भूमि सड़क और खनन के लिए ली गई है। साल 1980 में वन संरक्षण अधिनियम बनने के बाद से अब तक देशभर में 10 लाख 26 हजार हेक्टेयर वन भूमि का गैर वनीय उपयोग के लिए डायवर्जन हुआ। यह भूमि दिल्ली के भौगोलिक क्षेत्रफल से लगभग 7 गुना अधिक है। पिछले 15 साल में 3,05,756 हेक्टेयर वन भूमि गैर वन भूमि में बदली। 1990 में 1.27 लाख हेक्टेयर सबसे अधिक वन भूमि गैर वन भूमि में बदली थी।


पांच साल में वन भूमि का उपयोग

सड़क-19,497 हेक्टेयर
खनन -18,790 हेक्टेयर
ट्रांसमिशन लाइन व सिंचाई -10 हजार हेक्टेयर
रक्षा परियोजना-7,631 हेक्टेयर
हाइड्रो परियोजना-6,218 हेक्टेयर
रेल परियोजना- 4,770 हेक्टेयर

इनके लिए भी ली गई वन भूमि

अस्पताल/डिस्पेंसरी, पेयजल योजना, वनग्रामों का कन्वर्जन, उद्योग, ऑप्टिकल फाइबर केबल, पाइपलाइन, पुनर्वास, स्कूल, विद्युतीकरण।

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इन राज्यों में कितनी वन भूमि बदली

राजस्थान-2972.12 हेक्टेयर
मध्यप्रदेश-19730.36 हेक्टेयर
छत्तीसगढ़-2802.38 हेक्टेयर
गुजरात-8064.76 हेक्टेयर
नई दिल्ली-85.05 हेक्टेयर
उत्तर प्रदेश-4090.64 हेक्टेयर
पश्चिम बंगाल-621.68 हेक्टेयर
महाराष्ट्र-2137.89 हेक्टेयर
ओडिशा-13304.79 हेक्टेयर
बिहार-1852.75 हेक्टेयर
जम्मू-कश्मीर-450.65 हेक्टेयर
तमिलनाडु-135.63 हेक्टेयर

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