
kanwar yatra Nameplate controversy in UP: उत्तर प्रदेश में कांवर मार्ग (Kanwar Marg in UP) पर खाने-पीने की दुकानों पर पूरा नाम लिखे जाने के आदेश के बाद देश में राजनीति दो धड़े में बंट गई है। भारतीय जनता पार्टी और इसकी सहयोगी पार्टियां आदेश के पक्ष पर दिख रही हैं लेकिन वहीं विपक्षी पार्टियों ने इस पर मोर्चा खोल दिया है। केंद्र सरकार ने बजट से पहले रविवार को नई दिल्ली में एक सर्वदलीय बैठक बुलाई। इस बैठक में एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने भी भाग लिया। औवेसी ने नई दिल्ली में कहा कि अगर कोई सरकार संविधान (Constitution) के खिलाफ आदेश पारित करती है तो भारत सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 17 का उल्लंघन है। इस आदेश से छुआछूत (Untouchability) को बढ़ावा मिलेगा। यह जीवन जीने के अधिकार (Right to Live) के खिलाफ है। यह फैसला आजीविका के साधन जुटाने के खिलाफ है।
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि कल को एक मुसलमान कहेगा कि वह रमज़ान में 30 दिन उपवास रखता है और 15 दिन तक पानी नहीं पीता है। क्या वह 24 घंटे किसी को पानी नहीं देंगे? यह आदेश सिर्फ मुसलमानों के खिलाफ खुला भेदभाव है। उन्होंने कहा कि क्या रमजान के दौरान शराब की दूकानें बंद की जाएंगी?
सावन के महीने में कांवड़ यात्रा के शुरू होने से पहले उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर प्रशासन ने कावड़ मार्ग में पड़ने वाली दुकानों के मालिकों से अपना नाम दुकान पर लिखने को कहा है। इस आदेश को लेकर मुस्लिम और पिछड़ा जाति के लोग काफी आहत हैं। असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुनौती देते हुए कहा कि उनमें हिम्मत हो तो इस आदेश की एक लिखित कॉपी जारी करके दिखा दें। ओवैसी ने इस आदेश को असंवैधानिक आदेश बताया।
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि इससे मुसलमानों के खिलाफ नफरत बढ़ेगी। गरीब मुसलमानों को नौकरियों से निकाला जाएगा। बीजेपी यह तय कर चुकी है कि मुसलमानों को सेकंड क्लास सिटीजन बना दिया जाए। हिटलर ने भी यही किया था।
Updated on:
22 Jul 2024 10:49 am
Published on:
21 Jul 2024 04:08 pm
