
ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी फोटो फाइल-पत्रिका
सुवेंदु अधिकारी ने एक बार फिर ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को पटखनी दी है। साल 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections) में उन्होंने टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को नंदीग्राम में हराया था। वहीं, इस बार उन्होंने भवानीपुर में भी दीदी को सियासी पटखनी दे दी। सुवेंदु के भवानीपुर से ममता को चुनौती देने को लेकर अब कई राजनीतिक विश्लेषण भी सामने आ रहे हैं।
माना जा रहा है कि सुवेंदु का भवानीपुर में ममता बनर्जी के खिलाफ उतारना, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की TMC सुप्रीमो को उनके ही घर में हराने की रणनीति की शुरुआत थी। इसके बाद जमीनी स्तर पर अथक मेहनत, सटीक प्लानिंग और पूरी तरह फोकस्ड मैनेजमेंट का नतीजा था कि ममता बनर्जी को भवानीपुर में करारी हार का सामना करना पड़ा और उनकी पार्टी बंगाल में बुरी तरह से हार गई। यह जीत इन चुनावों का सबसे बड़ा और नाटकीय उलटफेर साबित हुई। BJP के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, अमित शाह ने बहुत पहले ही तय कर लिया था कि ममता बनर्जी को उनके अपने गढ़ में हराकर एक मजबूत संदेश दिया जाएगा।
सुवेंदु अधिकारी जैसे जुझारू और काबिल नेता को साथ पाकर अमित शाह ने भवानीपुर के लिए एक विशेष समर्पित टीम गठित की। BJP के चुनाव प्रचार में शामिल एक सूत्र के मुताबिक, कोलकाता में शाह ने जितनी भी रातें गुजारीं, उनमें से अधिकांश बैठकें सिर्फ भवानीपुर सीट पर केंद्रित रहीं। भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में करीब 25,000 गुजराती और 21,000 मारवाड़ी वोटर थे, जो चुनावी नतीजे तय करने में अहम भूमिका निभा सकते थे।
शाह ने इन दोनों समुदायों के अलग-अलग समूहों से मुलाकात की। इन बैठकों के दौरान एक अनौपचारिक रात्रिभोज का भी आयोजन किया गया, जिससे माहौल काफी सहज और विश्वास भरा बन गया। इन समुदायों ने शिकायत की कि पिछले चुनावों में TMC कार्यकर्ताओं ने उन्हें वोट डालने से रोका, धमकाया और उनके नाम पर फर्जी वोट डाले गए। BJP पदाधिकारी के अनुसार, लोगों ने कहा कि अगर उनकी सोसायटियों में सुरक्षा दी जाए तो वे बिना डर के वोट डाल सकेंगे। शाह ने इसकी पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की। वहीं, सुवेंदु अधिकारी ने भी जीत के बाद इसका जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि भवानीपुर की जीत में राजस्थान बीजेपी के कद्दावर नेता राजेंद्र राठौर और राजस्थान के 8 एमएलए का महत्वपूर्ण योगदान है। जिनकी बदौलत उन्होंने ममता को शिकस्त दी।
शाह की टीम ने भवानीपुर के हर बूथ पर एक समर्पित बूथ-स्तरीय प्रभारी नियुक्त किया। उनका काम था कि पार्टी के अंदर किसी भी तरह की कलह या मतभेद को तुरंत सामने लाना। साथ ही, TMC की ओर से हो रही किसी भी धमकी, जबरदस्ती या गड़बड़ी की रिपोर्ट करना।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने निर्देश था कि BJP के सभी कार्यकर्ता सुबह 11 बजे तक अपना वोट डाल लें और उसके बाद पूरे जोर से अन्य मतदाताओं को वोट डलवाने में जुट जाएं। दूसरे राज्यों के BJP विधायकों को भी खास समुदायों से जुड़ाव के आधार पर तैनात किया गया।
वहीं, SIR प्रक्रिया के तहत भवानीपुर की वोटर लिस्ट से लगभग 47,000 नाम हटा दिए गए। भाजपा का आरोप था कि ये या तो मृत वोटर थे या डुप्लिकेट एंट्री, जिनका कथित तौर पर TMC फर्जी वोटिंग के लिए इस्तेमाल करती थी। लिहाजा ममता बनर्जी 15 हजार से ज्यादा मतों से हार गई।
हालांकि ममता बनर्जी ने हार के बाद आरोप लगाया कि अलोकतांत्रिक तरीके से चुनाव छीना गया, लेकिन BJP इसे अपनी रणनीतिक और संगठनात्मक जीत मान रही है। यह हार न सिर्फ ममता बनर्जी के लिए व्यक्तिगत झटका थी, बल्कि पूरे बंगाल में TMC की स्थिति को और कमजोर करने वाला साबित हुआ।
Published on:
06 May 2026 09:17 am
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