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अरावली पर्वतमाला की परिभाषा और सीमांकन: सुप्रीम कोर्ट ने गठित की समिति, 31 अगस्त तक रिपोर्ट देने के निर्देश

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा और सीमांकन की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की है। समिति 31 अगस्त 2026 तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी।

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सुप्रीम कोर्ट (ANI)

Aravali Hills: सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा और सीमांकन की फिर जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है। इसके अलावा अदालत ने समिति को केंद्र सरकार की अक्टूबर, 2025 की रिपोर्ट में मौजूद अस्पष्टताओं की जांच कर 31 अगस्त, 2026 तक विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। इस उच्च स्तरीय समिति की अध्यक्षता भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) की महानिदेशक कंचन देवी करेंगी।

सबसे खास बात है कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता वाली समिति की ओर से तैयार रिपोर्ट के कार्यान्वयन पर रोक लगा चुका है। अदालत ने तब कहा था कि अरावली पर्वतमाला जैसे संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र के मामले में एक स्वतंत्र और निष्पक्ष विशेषज्ञ निकाय की ओर से नए सिरे से वैज्ञानिक एवं पारिस्थितिक मूल्यांकन आवश्यक है।

उच्च-स्तरीय समिति के सदस्य

भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद यानी आईसीएफआरई की महानिदेशक कंचन देवी के अलावा समिति में भारतीय वन सर्वेक्षण के पूर्व महानिदेशक डॉ. सुभाष आशुतोष, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के पूर्व निदेशक डॉ. राजेंद्र कुमार शर्मा, पर्यावरण मंत्रालय के पूर्व संयुक्त सचिव बृज मोहन सिंह राठौर और दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अशोक के. भटनागर को सदस्य बनाया गया है। इसके अतिरिक्त बेंगलूरु स्थित भारतीय मानव बस्ती संस्थान के प्रोफेसर जगदीश कृष्णस्वामी और हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर लक्ष्मीकांत शर्मा को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया है। पर्यावरण मंत्रालय निदेशक स्तर के एक अधिकारी को समिति का सदस्य सचिव नामित करेगा।

यह जांच करेगी समिति

  1. अरावली पर्वतमाला की परिभाषा को दो या अधिक पहाड़ियों के बीच 500 मीटर की सीमा तक सीमित करने से संरक्षित क्षेत्र का दायरा घटता है या नहीं।
  2. खनन जैसी पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की आशंका है या नहीं।
  3. 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियां 500 मीटर से अधिक दूरी पर होने के बावजूद एक निरंतर पारिस्थितिक संरचना बनाती हैं या नहीं।
  4. 12,081 पहाड़ियों में से केवल 1,048 के 100 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले होने संबंधी दावे की सत्यता की जांच।
  5. अरावली क्षेत्र के संरक्षण से जुड़े मौजूदा नियामक ढांचे की कमियों का आकलन कर आवश्यक सुझाव देगी।

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