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13 की उम्र में वैज्ञानिक! भारतीय मूल की एरिका कुंडू ने मूंगफली के छिलकों से कर डाला कमाल

Arika Kundu: अमेरिका में रहने वाली 13 वर्षीय भारतीय मूल की छात्रा एरिका कुंडू ने मूंगफली के छिलकों की मदद से फलों और सब्जियों पर मौजूद कीटनाशकों के अवशेष हटाने की नई तकनीक LIGNEX विकसित की है। इस नवाचार के दम पर उन्होंने 2026 3M यंग साइंटिस्ट चैलेंज के टॉप-10 फाइनलिस्ट में जगह बनाई है।
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Arika Kundu lignex peanut shell pesticide removal technology

अमेरिका में रहने वाली 13 वर्षीय भारतीय मूल की छात्रा एरिका कुंडू। फोटो सोर्स Insta (the_great_india_vision)

Arika Kundu: अमेरिका में रहने वाली भारतीय मूल की एक बच्ची ने कमाल कर दिखाया है। महज 13 साल की उम्र में उसने फल-सब्जियों को कीटनाशकों से मुक्त करने की क्रांतिकारी तकनीक विकसित की है। मिनेसोटा स्थित मिनेटोंका मिडिल स्कूल ईस्ट की सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली एरिका कुंडू की यह तकनीक मूंगफली के छिलकों पर आधारित है, जिसे हम अक्सर फेंक देते हैं।

एरिका कुंडू ने अपने प्रोजेक्ट का नाम 'LIGNEX' रखा है। यह एक नई बायोसॉर्प्शन-आधारित तकनीक है। इसमें एग्रीकल्चरल वेस्ट इस्तेमाल करके ताजे फल-सब्जियों पर मौजूद कीटनाशकों के अवशेषों को हटाया जाता है। दरअसल, पानी से धोने पर भी फल और सब्जियों पर हानिकारक रासायनिक कीटनाशक चिपके रह जाते हैं। ऐसे में उनके सेवन से फायदे की जगह कई तरह के स्वास्थ्य संबंधी नुकसान हो सकते हैं। एरिका की तकनीक इस नुकसान की आशंका को काम कर देगी।

 अपने इस प्रोजेक्ट की बदौलत एरिका ने अमेरिका के प्रतिष्ठित 2026 3M यंग साइंटिस्ट चैलेंज के टॉप 10 फाइनलिस्ट में जगह बनाई है। राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली इस प्रतियोगिता के तहत 11 से 14 साल के उन मिडिल स्कूल स्टूडेंट्स को सम्मानित किया जाता है, जो रोजमर्रा की समस्याओं के समाधान के लिए विज्ञान-आधारित समाधान विकसित करते हैं। एरिका को अब 3M के वैज्ञानिक के मार्गदर्शन में अपने प्रोजेक्ट को और बेहतर बनाना होगा। इसके बाद वह अक्टूबर में होने वाली अंतिम चरण की प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगी, जहां उन्हें 25,000 डॉलर का ग्रैंड प्राइज और अमेरिका के यंग साइंटिस्ट का खिताब जीतने का मौका मिलेगा।

केवल धोना काफी नहीं

फलों और सब्जियों को उगाने के लिए कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाता है। आमतौर पर हम केवल उन्हें पानी से धोते हैं और यह मान लेते हैं कि वो पूरी तरह रसायनों से मुक्त हो गए। जबकि ऐसा होता नहीं है। पानी से धोने पर मिट्टी और कुछ रसायन तो हट जाते हैं, लेकिन सभी कीटनाशक पूरी तरह साफ नहीं हो पाते। इसी समस्या का समाधान खोजने के लिए एरिका ने एक ऐसा व्यावहारिक और कम लागत वाला तरीका विकसित किया है, जिससे इन कीटनाशकों को अधिक प्रभावी ढंग से हटाया जा सके। इस काम के लिए बाजार में मिलने वाले महंगे पदार्थों का उपयोग करने के बजाए एरिका ने कृषि अपशिष्ट यानी एग्रीकल्चरल वेस्ट पर ध्यान केंद्रित किया।

मूंगफली के दाने निकालने के बाद छिलकों को आमतौर पर फेंक दिए जाते हैं। एरिका ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जिसमें इन छिलकों को एक ऐसे पदार्थ में बदला जाता है जो ताजे फलों एवं सब्जियों की सतह पर मौजूद कीटनाशकों के अवशेषों को अपने भीतर सोख लेता है।

कैसे करता है काम?

यह प्रोजेक्ट बायोसॉर्प्शन नामक वैज्ञानिक प्रक्रिया पर आधारित है। जैसे स्पंज पानी को सोख लेता है, ठीक वैसे ही कुछ प्राकृतिक पदार्थ विशेष रसायनों को अपनी ओर आकर्षित करके उन्हें अपने भीतर रोक सकते हैं। एरिका द्वारा तैयार मूंगफली के छिलकों का पदार्थ एक प्राकृतिक फिल्टर की तरह काम करता है। जब ताजे फल-सब्जियां इस पदार्थ के संपर्क में आते हैं, तो यह उनकी सतह पर मौजूद कीटनाशकों के अवशेषों को अपने भीतर सोख लेता है। 

इसलिए एक्सेप्ट किया चैलेंज

3M और डिस्कवरी एजुकेशन की ओर से आयोजित 3M यंग साइंटिस्ट चैलेंज का यह 19वां साल है। इस प्रतियोगिता में 5वीं से 8वीं कक्षा के स्टूडेंट्स को रोज़मर्रा की समस्याओं के लिए विज्ञान-आधारित समाधान विकसित करने के लिए आमंत्रित किया जाता है। एरिका का कहना है कि उन्होंने 3M यंग साइंटिस्ट चैलेंज में इसलिए भाग लिया ताकि वह अपने इनोवेशन को और बेहतर बना सकें और इसे ऐसे उत्पाद में बदल सकें, जिसका फायदा हर किसी को मिले। वहीं, डिस्कवरी एजुकेशन के सीईओ ब्रायन शॉ ने कहा कि एरिका सहित सभी प्रतिभागियों की तारीफ करते हुए कहा कि इन बच्चों ने साबित कर दिया है कि वैज्ञानिक बनने के लिए उम्र मायने नहीं रखती।

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