
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल । (फोटो: पत्रिका)
Delhi High Court : दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं सौरभ भारद्वाज व गोपाल राय की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय की मौजूदा न्यायाधीश न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को निशाना बना कर सोशल मीडिया पर एक 'समन्वित और सुनियोजित' दुष्प्रचार अभियान चलाने के आरोप में इन तीनों नेताओं के खिलाफ अदालत में एक आपराधिक अवमानना याचिका दायर की गई है। इस संवेदनशील मामले पर न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर दुडेजा की खंडपीठ शुक्रवार को सुनवाई करने वाली है।
अधिवक्ता अशोक चैतन्य की ओर से न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 15(1)(सी) और संविधान के अनुच्छेद 215 के तहत यह याचिका दाखिल की गई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि आम आदमी पार्टी के इन तीनों शीर्ष नेताओं ने सोची-समझी रणनीति के तहत अदालत की साख को बट्टा लगाने, उसके अधिकार क्षेत्र को कमजोर करने और लंबित न्यायिक प्रक्रिया में सीधे तौर पर बाधा डालने का प्रयास किया है।
यह पूरा मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो की उस पुनरीक्षण याचिका से जुड़ा हुआ है, जिसमें भ्रष्टाचार के एक मामले में आरोपियों को बरी करने के फैसले को चुनौती दी गई है, और केजरीवाल भी इसमें एक आरोपी हैं। इस मामले की सुनवाई पहले न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में चल रही थी। याचिका के अनुसार, जब केजरीवाल इस केस को दूसरी जगह स्थानांतरित कराने और सुप्रीम कोर्ट से राहत पाने में नाकाम रहे, तो उन्होंने न्यायाधीश को सुनवाई से हटाने की मांग करते हुए एक आवेदन दिया।
याचिकाकर्ता का दावा है कि जब यह आवेदन अदालत में लंबित था, तभी इन नेताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर न्यायाधीश के खिलाफ एक पूर्वाग्रही और हितों के टकराव के आरोपों से भरा संगठित अभियान शुरू कर दिया। विशेष रूप से 9 अप्रेल को पोस्ट किए गए एक संदेश का उल्लेख किया गया है, जिसे केजरीवाल, भारद्वाज और राय ने रीपोस्ट किया था। इसमें न्यायाधीश के परिजनों का हवाला देकर उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए थे।
अवमानना याचिका में कहा गया है कि मामले में खुद पक्षकार होने के बावजूद अरविंद केजरीवाल ने इस भ्रामक पोस्ट को "क्या यह सच है? बहुत विस्फोटक" जैसी टिप्पणी के साथ रीपोस्ट किया, ताकि इन झूठे आरोपों को सच साबित किया जा सके। इसके अलावा, 27 अप्रेल को फेसबुक पर की गई एक अन्य पोस्ट का भी हवाला दिया गया है, जिसमें केजरीवाल ने अदालत से न्याय की उम्मीद न होने की बात कहकर कार्यवाही के बहिष्कार का ऐलान किया था और इसे अपनी प्रोफाइल पर पिन भी किया था। याचिकाकर्ता का तर्क है कि इन हरकतों से न्याय व्यवस्था में जनता का भरोसा डगमगाया है, जो आपराधिक अवमानना के दायरे में आता है। इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए जीएनसीटीडी के स्थायी वकील (अपराधिक) द्वारा 30 अप्रैल को ही सहमति दी जा चुकी है।
Updated on:
21 May 2026 09:38 pm
Published on:
21 May 2026 09:27 pm
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