
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (IANS Photo)
Voter List Deletion 6.5 Crore Claim: एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने मोदी सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है। ओवैसी ने कहा कि सरकार अपनी बदनामी से बचने के लिए जनगणना (Census) के आंकड़ों और इसकी विश्वसनीयता के साथ खिलवाड़ कर रही है। सही डेटा को सामने आने से रोका जा रहा है ताकि सच छुपाया जा सके। ओवैसी ने नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे ((National Family Health Survey) का हवाला देते हुए कहा कि लोग आज भी खुले में शौच जा रहें है। साथ ही उन्होंने वोटर लिस्ट से 6.5 करोड़ नाम हटाने और इसके बहाने मुसलमानों, महिलाओं व गरीबों को निशाना बनाने का भी गंभीर आरोप लगाया है।
असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए एक बयान जारी किया है। ओवैसी का ने कहा कि सरकार सहीं डेटा को सामने आने से रोक रही है। ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बात रखते हुए में कहा कि झूठ तीन तरह के होते हैं, झूठ, बहुत बड़ा झूठ और आंकड़े। जनगणना के आंकड़े परिसीमन, विकास योजनाओं और खाद्य सुरक्षा के लिए जरूरी हैं। मोदी सरकार सिर्फ इसलिए जनगणना की विश्वसनीयता को खतरे में डाल रही है ताकि उसे शर्मिंदा न होना पड़े।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जनगणना कर्मचारियों को फील्ड वर्क के दौरान सरकारी रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत में भारी अंतर देखने को मिला है। सरकार जिन गांवों को 'ओपन डेफिकेशन फ्री' यानी खुले में शौच से मुक्त घोषित कर चुकी है, वहां आज भी लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। यही नहीं, कागजों पर जिन घरों में एलपीजी (LPG) गैस कनेक्शन दिखा दिए गए हैं, कई घर ऐसे भी मिले हैं जहां बिजली का कनेक्शन तक नहीं है। जब यह गड़बड़ी पकड़ी गई, तो अधिकारियों ने कर्मचारियों को दोबारा जाकर वेरिफिकेशन करने के निर्देश दिए हैं।
ओवैसी ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया पर भी बेहद गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया के तहत 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट से करीब 6.5 करोड़ नाम हटा दिए गए हैं। ओवैसी ने कहा कि इस तरह की एक्सरसाइज का इस्तेमाल भारतीयों के एक बड़े वर्ग को हमेशा के लिए अधिकारों से बेदखल करने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने ऐसी रिपोर्ट्स का भी जिक्र किया जहां वोटर लिस्ट से नाम कटने के बाद गरीबों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और राशन के लाभ से हाथ धोना पड़ा है।
ओवैसी ने आरोप लगाया कि लिस्ट से जिन लोगों को बाहर निकाला गया है, उनमें सबसे बड़ी संख्या मुसलमानों, महिलाओं, गरीबों और प्रवासी मजदूरों की है। उन्होंने कहा कि जब देश का टोटल फर्टिलिटी रेट (TFR) 2.0 पर आ चुका है और आबादी पूरी तरह स्थिर है, तो फिर इस तरह की कमेटियां बनाकर लोगों को बाहर करने की क्या जरूरत है।
Updated on:
5 Jun 2026, 5:55 PM IST
Published on:
5 Jun 2026, 5:55 PM IST
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