
बलूचिस्तान में पाकिस्तान की डेथ स्क्वाड। ( फोटो : ANI)
Extrajudicial Killings: बलूचिस्तान में आम नागरिकों पर अत्याचार और जुल्म का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बलूच यकजेहती कमेटी ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और उनके समर्थित समूहों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हाल ही में केच और पंजगुर जिलों में दो युवा बलूच लड़कों की बेरहमी से हत्या कर दी गई। इन घटनाओं ने एक बार फिर से बलूचिस्तान में 'इन्साफ की अनदेखी करते हुए कत्ल और जबरन गायब करने वाले मामलों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। बलूच लोगों का आरोप है कि उन्हें उनके ही घर में असुरक्षित कर दिया गया है।
पहली दर्दनाक घटना केच जिले की है। यहां बुलेदा के रहने वाले मोहम्मद शरीफ के 27 वर्षीय बेटे मेहरान बलूच को दिनदहाड़े मौत के घाट उतार दिया गया। वह 21 मई को जब मेहरान सुरप बाजार स्थित अपनी दुकान की ओर जा रहा था, तब अज्ञात हथियारबंद लोगों ने उस पर सरेआम गोलियों की बौछार कर दी। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। बलूच यकजेहती कमेटी का दावा है कि इस जघन्य हत्याकांड के पीछे उन 'डेथ स्क्वॉड' का हाथ है, जिन्हें सीधे तौर पर पाकिस्तानी हुक्मरानों और सुरक्षा बलों का समर्थन प्राप्त है। मेहरान एक बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखता था और दुकान चलाकर अपना घर पालता था।
दूसरी घटना पंजगुर जिले के पारूम इलाके की है, जहां 21 साल के ड्राइवर मोहसिन को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने कथित तौर पर अपहरण कर लिया। मोहसिन को 16 मार्च 2026 को जीरक क्रॉसिंग पॉइंट से हिरासत में लिया गया था। इसके बाद वह बिना किसी कानूनी आरोप के अचानक गायब हो गया। वह 66 दिनों तक उसका परिवार दर-दर भटकता रहा, लेकिन ईद की छुट्टियों के दौरान पारूम के कल्लाग इलाके से मोहसिन की लाश बरामद हुई। बीवाईसी ने इस हत्या के लिए सीधे तौर पर फ्रंटियर कोर के जवानों को जिम्मेदार ठहराया है। मोहसिन अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था।
बीवाईसी ने स्थिति की भयावहता को उजागर करते हुए बताया है कि बलूचिस्तान में चप्पे-चप्पे पर सैन्य चौकियां और सुरक्षा बलों का पहरा है। इसके बावजूद, राज्य समर्थित हथियारबंद गिरोह और नशा तस्कर बिना किसी डर के खुलेआम घूम रहे हैं। दूसरी ओर, निर्दोष बलूच नागरिकों को लगातार धमकियां मिल रही हैं, उन्हें निशाना बनाया जा रहा है और मौत के घाट उतारा जा रहा है। बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ये कोई छिटपुट घटनाएं नहीं हैं, बल्कि यह बलूचिस्तान में लोगों को अवैध रूप से हिरासत में लेने और हिरासत में हत्या करने के एक सुनियोजित पैटर्न का हिस्सा है।
इन घटनाओं के बाद बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी सेना के खिलाफ तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। मानवाधिकार संगठनों ने इस 'टारगेटेड किलिंग' की कड़ी निंदा करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान पर दबाव बनाने की मांग की है।
इन हत्याओं के विरोध में बलूच यकजेहती कमेटी आने वाले दिनों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रही है। अगर सरकार ने आरोपियों पर तुरंत कार्रवाई नहीं की, तो बलूचिस्तान के कई जिलों में शटडाउन और रैलियां आयोजित की जा सकती हैं।
बहरहाल, एक तरफ पाकिस्तान भयंकर आर्थिक संकट से जूझ रहा है और दुनिया से कर्ज मांग रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह अपने ही देश के एक संसाधन-संपन्न प्रांत (बलूचिस्तान) के नागरिकों को कुचलने में अपनी सैन्य शक्ति और पैसा लगा रहा है। यह बलूच युवाओं में पाकिस्तान के खिलाफ और अधिक अलगाववाद को जन्म दे रहा है। (इनपुट:ANI)
Updated on:
24 May 2026 07:28 pm
Published on:
24 May 2026 07:17 pm
बड़ी खबरें
View Allराष्ट्रीय
ट्रेंडिंग
