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बिहार सरकार को बड़ी राहत, जाति जनगणना के खिलाफ सभी रिट सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज

Caste Census Big relief Supreme Court सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बिहार सरकार और उसके चीफ नीतीश कुमार के चेहरे पर खुशी आ गई। जाति जनगणना के खिलाफ दायर सभी याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। और कहाकि, और आरक्षण को सही तरीके से लागू करने के लिए जातिगत जनगणना जरूरी है।

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बिहार सरकार को बड़ी राहत, जातीय जनगणना के खिलाफ सभी रिट सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज

बिहार में 7 जनवरी से जाति जनगणना का कार्य हो रहा है। जाति जनगणना के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। जिसमें इसे रद करने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार के जाति आधारित जनगणना कराने के फैसले के खिलाफ दाखिल सभी याचिकाओं को सिरे से खारिज करते हुए उस पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहाकि, याचिकाएं विचार योग्य नहीं हैं। और आरक्षण को सही तरीके से लागू करने के लिए जाति जनगणना जरूरी है। साथ ही याचिकाकर्ताओं को अपनी बात को रखने के लिए पटना हाईकोर्ट जाने की सलाह दी। बिहार निवासी अखिलेश कुमार ने बिहार सरकार के जातीय जनगणना के फैसले के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद बिहार सरकार ने राहत की सांस ली। अब बिहार में जाति जनगणना जारी रह सकेगी।

यह एक प्रचार हित याचिका - पीठ

जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने कहाकि, यह एक प्रचार हित याचिका है। हम विशेष जाति को कितना आरक्षण दिया जाना चाहिए, इस बारे में निर्देश कैसे जारी कर सकते हैं। हम इस तरह के निर्देश जारी नहीं कर सकते हैं और इन याचिकाओं पर विचार नहीं कर सकते हैं।

कानून में उचित उपाय खोजने की स्वतंत्रता

सुप्रीम कोर्ट ने एक एनजीओ और अन्य द्वारा दायर तीन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि, सभी याचिकाओं को वापस ले लिया गया मानकर खारिज किया जाता है और कानून में उचित उपाय खोजने की स्वतंत्रता दी जाती है।

जातीय जनगणना के खिलाफ इन्होंने दायर की याचिका

बिहार निवासी अखिलेश कुमार ने बिहार सरकार के जातीय जनगणना कराने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अखिलेश कुमार के अलावा हिंदू सेना नामक संगठन ने भी जाति जनगणना की अधिसूचना पर रोक की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

बिहार में जातीय जनगणना क्या है जानें ?

बिहार में 7 जनवरी से जाति आधारित सर्वे शुरू हो चुका है। राज्य सरकार ने इस सर्वे को कराने की जिम्मेदारी जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट को सौंपी गई है। इसके तहत सरकार मोबाइल फोन ऐप के जरिए हर परिवार का डाटा डिजिटल रुप से एकत्र किया जा रहा है। यह जातीय सर्वे दो चरणों में होगा। दूसरा चरण एक अप्रैल से 30 अप्रैल तक होगा। इस सर्वे पर करीब 500 करोड़ रुपए खर्च होंगे। साल के अंत जाति आधारित सर्वे का कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

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