
नीतीश कुमार और उनके बेटे निशांत। ( फोटो: IANS)
Bihar Politics: बिहार में नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार (Nishant Kumar) की राजनीति में एंट्री हो गई है। रविवार को उन्होंने जेडीयू की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, JDU नेता और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन (ललन) सिंह और बिहार JDU अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा भी मौजूद रहे। पार्टी के शामिल होने के बाद निशांत ने कहा कि मैं सभी का शुक्रिया अदा करता हूं। आप सभी ने मुझ पर जो भरोसा जताया है, मैं उस पर खरा उतरने की कोशिश करूंगा। बिहार और देश के लिए मेरे पिता ने पिछले 20 सालों में जो किया है, मुझे उस पर गर्व है।
जेडीयू परिवार का हिस्सा बनने के ठीक बाद निशांत कुमार (Nishant Kumar) ने अपनी पहली प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बेहद विनम्रता से कहा कि, "मैं इस मंच से आप सभी का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूं। आप सभी ने मुझ पर जो इतना बड़ा भरोसा जताया है, मैं हर कदम पर उस पर खरा उतरने की पूरी कोशिश करूंगा। बिहार के विकास और देश की प्रगति के लिए मेरे पिता (नीतीश कुमार Nitish Kumar) ने पिछले 20 सालों में जो अथक प्रयास किए हैं, मुझे उनके उस काम पर बहुत गर्व है।"
निशांत के सक्रिय राजनीति में आते ही बिहार की सियासत में कई बड़े बदलावों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 75 वर्षीय नीतीश कुमार जल्द ही मुख्यमंत्री पद की कुर्सी छोड़ सकते हैं और वे उच्च सदन यानी राज्यसभा का रुख कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो गठबंधन के तहत मुख्यमंत्री की कुर्सी सहयोगी दल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के खाते में जा सकती है। इसका सीधा मतलब है कि बिहार के इतिहास में पहली बार बीजेपी का कोई नेता मुख्यमंत्री बन सकता है।
वहीं, जेडीयू के भीतर यह मांग जोर पकड़ रही है कि नई सरकार में निशांत कुमार को बिहार का उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) बनाया जाए। नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले हरनौत के जेडीयू विधायक हरि नारायण सिंह ने दावा किया है कि नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद निशांत को डिप्टी सीएम बनाने पर सर्वसम्मति बन चुकी है। हालांकि, पार्टी के कुछ अन्य नेताओं का कहना है कि नई कैबिनेट में निशांत की क्या भूमिका होगी, इसका अंतिम और सर्वमान्य फैसला खुद नीतीश कुमार ही तय करेंगे।
निशांत की एंट्री पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की तरफ से कई अहम रिएक्शन सामने आ रहे हैं। जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने साफ किया है कि पार्टी संगठन में निशांत को आगे चलकर बड़ी और अहम जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही नीतीश कुमार राज्यसभा चले जाएं, लेकिन साल 2030 तक बिहार की सरकार पूरी तरह से उन्हीं के मार्गदर्शन और दिशा-निर्देश में चलती रहेगी।
उधर विधायक भगवान सिंह कुशवाहा ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी या सरकार में निशांत की जो भी भूमिका मिलेगी, उस पर किसी को कोई आपत्ति नहीं होगी। वहीं, जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि निशांत कुमार की एंट्री बिहार की राजनीति के लिए एक बिल्कुल अलग और सकारात्मक बदलाव साबित होगी।
सियासत की चकाचौंध और बयानबाजी से अब तक पूरी तरह दूरी बनाए रखने वाले निशांत कुमार की पृष्ठभूमि काफी दिलचस्प है। 40 का आंकड़ा पार कर चुके निशांत भी अपने पिता नीतीश कुमार की तरह ही एक पढ़े-लिखे इंजीनियरिंग ग्रेजुएट हैं। जेडीयू नेताओं का मानना है कि उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी सादगी, विनम्र स्वभाव और उच्च शिक्षा है।
नीतीश कुमार के बेटे होने के नाते उन्हें एक बेदाग राजनीतिक विरासत मिल रही है जो उनके लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। पार्टी में शामिल होने से ठीक पहले शनिवार को निशांत ने जेडीयू के युवा विधायकों, वरिष्ठ नेताओं और जिलाध्यक्षों के साथ कई मैराथन बैठकें की थीं। इन बैठकों में पार्टी के भविष्य और राज्यसभा कदम के बाद की रणनीति पर गहरी चर्चा की गई। कुल मिलाकर, निशांत अब बिहार के राजनीतिक मंच पर एक नई पारी खेलने के लिए पूरी तरह से तैयार नजर आ रहे हैं।
Updated on:
08 Mar 2026 02:36 pm
Published on:
08 Mar 2026 02:07 pm
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