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बिहार में शराबियों की अब खैर नहीं, आधार कार्ड से पकड़े जाएंगे शराबी मिलेगी जेल की सजा

बिहार में आधार कार्ड से पकड़े जाएंगे शराबी। डेटा बेस बनाया जा रहा है। अब बचके रहे बिहार के शराबी। नहीं तो जेल में काटनी होगी सजा। जानें बिहार सरकार की नई योजना।

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बिहार में शराबियों की अब खैर नहीं, आधार कार्ड से पकड़े जाएंगे शराबी जाएंगे जेल

बिहार में शराब पूर्ण रुप से बंद है। बावजूद इसके शराबियों पर पूरी तरह से पकड़ करने में बिहार सरकार नाकाम हो रही है। बिहार में कानून है कि पहली बार शराब पीते पकड़े जाने पर जुर्माना देकर छूट जाएंगे। पर दूसरी बार सजा मिलेगी। पर सरकार परेशान है कि, एक जिले में पहली बार शराब पीते पकड़े जाने पर जुर्माना भर कर शराबी छूट जाते है। दूसरे जिले में पकड़े जाने पर इनकी पहचान नहीं हो पाती है। तब अब बिहार सरकार ने एक रास्ता निकाल लिया है। शराबियों की अब खैर नहीं। बिहार सरकार, अब शराबियों की पहचान के लिए आधार कार्ड की मदद लेगी। आप चौंक गए होंगे अरे शराबियों को पकड़ने में शराब का क्या काम है। तो जानें।

आधार कार्ड से मिलगी मदद

शराबियों और शराब कारोबारियों पर अंकुश लगाने के लिए बिहार सरकार अब शराबियों की पहचान के लिए आधार कार्ड की मदद लेगी। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, शराब पीकर पकड़े जाने वाले लोगों की आधार से पहचान सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक जिले के मद्यनिषेध कार्यालयों में आधार प्रमाणीकरण केंद्र खोला जाएगा।

दिसंबर से लागू होगी व्यवस्था

बिहार सरकार ने इसके लिए पूर्व में ही भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण को पत्र लिखा था। प्राधिकरण ने अब इसकी मंजूरी दे दी है। अगर सब कुछ सामान्य रहा तो दिसंबर से यह व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। इसके बाद शराबियों के आधार सत्यापन का काम शुरू हो जाएगा।

7 माह में 90 हजार ने दिया जुर्माना

सरकार का मानना है कि एक जिले में पहली बार शराब पीते पकड़े जाने पर जुर्माना भर कर शराबी छूट जाते है। दूसरे जिले में पकड़े जाने पर इनकी पहचान नहीं हो पाती है। विभाग के आंकड़े के मुताबिक, पिछले सात महीनों में राज्य में करीब 90 हजार से अधिक लोगों को पकड़ कर जुर्माना लेकर छोड़ा गया है।

दूसरी बार पकड़े जाने पर हर हाल में मिलेगी सजा

विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि, अब शराब पीने, बेचने या कारोबार करने के आरोप में गिरफ्तार सभी अभियुक्तों की पहचान का आधार डेटाबेस बनेगा। जिसे सुरक्षित रखा जाएगा। इसको लेकर 20 दिनों के अंदर सभी मद्यनिषेध अधीक्षक कार्यालयों में आधार प्रमाणीकरण केंद्र की व्यवस्था सुनिश्चित कर दी जाएगी। इससे बिहार में दूसरी बार शराब पीकर पकड़े जाने वाले आरोपित सजा से बच नहीं सकेंगे।

डेटाबेस दिलाएगा शराबियों को सजा

विभाग के अनुसार, शराबियों का सत्यापन पहले ठीक ढंग से नहीं हो पाता था। सत्यापन सही ढंग से नहीं होने पर वे बच निकलते थे। डेटाबेस होने के बाद इनकी पहचान निश्चित हो जाएगी।

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