
BJP प्रवक्ता प्रकाश रेड्डी (फोटो- ANI)
Prakash Reddy on INDIA bloc letter to CJI: स्पेशल इंटेंसिव रिविजन को लेकर INDIA ब्लॉक की ओर से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को लिखे गए पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए तेलंगाना BJP के प्रवक्ता प्रकाश रेड्डी ने विपक्षी दलों के इस कदम को लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनाव आयोग की छवि खराब करने की साजिश बताया।
प्रकाश रेड्डी ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखने से विपक्ष को कोई फायदा नहीं होने वाला है। अगर कांग्रेस और उसके सहयोगी दल सच में वोटर लिस्ट की फिक्र हैं, तो उन्हें हर पोलिंग बूथ पर अपने बूथ लेवल एजेंट (BLA) नियुक्त करने चाहिए क्योंकि अदालतों के चक्कर लगाने और संवैधानिक संस्थाओं पर कीचड़ उछालने से कुछ नहीं होगा।
बीते दिनों बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने इसी मामले को लेकर कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों के नेताओं का बयान सामने आया है। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि विपक्षी नेता पूरी तरह से बौखला चुके हैं। विपक्षी पार्टियां अब भारत की बर्बादी और अराजकता का कामना कर रही है। वह इस तरह से अपनी हार का बदला लेना चाहती है। बीजेपी के राज्यसभा सांसद त्रिवेदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट को लिखे उसके पत्र का अंदाज और भाषा वैसी ही है, जैसी आपातकाल के दौरान देखने को मिली थी।
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार कांग्रेस कार्यकर्ताओं को SIR प्रक्रिया में सक्रिय और तेजी से भाग लेने के लिए कह रहे हैं, जबकि उन्हीं की पार्टी के नेता SIR प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। त्रिवेदी ने कहा कि विपक्षी दलों ने सीजेआइ को पत्र लिखकर एसआइआर पर सवाल उठाया है, जबकि कोर्ट ने इस प्रक्रिया को उचित और कानूनी माना है। वे मामले की सुनवाई के दौरान एक बार भी अदालत में कोई ठोस तर्क पेश नहीं कर पाए। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के नेताओं को फर्जी वोटरों के दम पर सत्ता हासिल करने का सपना टूटता हुआ दिख रहा है।
कांग्रेस पार्टी ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में लोकतंत्र गंभीर संकट का सामना कर रहा है। उन्होंने प्रधान न्यायाधीश को संबोधित पत्र में चेतावनी दी कि जब संस्थागत ढांचा विफल हो जाता है तो लोकतंत्र अराजकता की ओर बढ़ने लगता है। उन्होंने कहा कि यदि न्यायपालिका भी अपनी भूमिका निभाने में असफल रही तो यह गणतंत्र के पूर्ण विघटन का संकेत होगा। विपक्षी दलों ने मांग की कि विशेष जांच प्रक्रिया (SIR) को तुरंत स्थगित कर दिया जाए और इसे तब शुरू किया जाए जब अगले विधानसभा चुनाव में कम से कम पांच साल का समय बचा हो।
Updated on:
05 Jul 2026 10:03 am
Published on:
05 Jul 2026 08:58 am
