
कर्नाटक के सीएम मुख्यमंत्री एन.सिद्धरामय्या (Photo- x/Siddaramaiah)
Karnataka Govt Survey: चुनावों की निष्पक्षता और ईवीएम पर भरोसे के बारे में कांग्रेस शासित कर्नाटक में एक सरकारी सर्वे रिपोर्ट से सियासी बवाल हो गया। बवाल के बाद मुख्यमंत्री एन.सिद्धरामय्या ने अपनी सरकार की रिपोर्ट पर ही सवाल खड़े किए, वहीं शुक्रवार शाम तक सर्वे रिपोर्ट को सरकारी वेबसाइट से हटा लिया गया।
दरअसल लोकसभा चुनाव 2024 के बाद मतदाता जागरूकता कार्यक्रम की प्रभावशीलता जांचने के लिए कर्नाटक निगरानी एवं मूल्यांकन प्राधिकरण (KMEA ) ने एक सर्वे करवाया था। इस सर्वे में राज्य के 83.61% लोगों ने कहा कि वे EVM पर भरोसा करते हैं और 84.55% ने माना कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष होते हैं। निष्पक्ष चुनाव का यह आंकड़ा 2023 के 77.9% से भी ज्यादा है, जो जनता के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
सर्वे की यह रिपोर्ट KMEA की वेबसाइट पर सार्वजनिक होते ही भाजपा ने इसे लपक लिया। भाजपा ने हमलावर होते हुए कहा कि सर्वे रिपोर्ट से कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी के 'वोट चोरी' का झूठ बेनकाब हो गया है। भाजपा नेता अमित मालवीय और प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने कहा कि कांग्रेस शासित राज्य की अपनी रिपोर्ट राहुल गांधी के झूठ को बेनकाब कर रही है।
अपनी ही सरकार की रिपोर्ट से कांग्रेस और राहुल गांधी के वोट चोरी अभियान को झटका लगते देख मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या खुद बचाव में उतरे और सर्वे को खारिज कर दिया। उन्होंने सर्वे रिपोर्ट को सांख्यिकीय रूप से कमजोर और पक्षपाती बताते हुए कहा कि कहा कि 5.3 करोड़ मतदाताओं वाले राज्य में सिर्फ 5100 लोगों का सर्वे (0.01 प्रतिशत से कम) कैसे पूरे राज्य की राय प्रतिबिंबित कर सकता है?
सिद्धरामय्या ने सर्वे कराने वाली एनजीओ 'ग्राम' के संस्थापक डॉ. आर बालासुब्रमण्यम पर हितों के टकराव का आरोप भी लगाया। मंत्री प्रियंक खरगे ने भी सर्वे को पूर्वाग्रह युक्त करार दिया।
Updated on:
03 Jan 2026 01:55 am
Published on:
03 Jan 2026 01:55 am
