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BRICS Summit 2026: ईरान-सऊदी-यूएई के अलग-अलग रुख के बीच भारत ने बनाई सहमति, ब्रिक्स संयुक्त बयान पर बनी बात, तड़के 4 बजे तक चली बातचीत

BRICS Summit से पहले भारत ने कई संवेदनशील मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच सहमति बनाने में सफलता हासिल की है। तड़के 4 बजे तक चली बातचीत के बाद संयुक्त बयान पर सहमति बनी है।
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भारत

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Anurag Animesh

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Updated: 12 Sep 2026, 3:38 PM IST

BRICS

ब्रिक्स समिट 2026(फोटो-ANI)

BRICS Joint Statement: भारत को ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन से पहले बड़ी कूटनीतिक कामयाबी मिली है। कई संवेदनशील मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच मतभेद के बावजूद भारत ने बातचीत के जरिए संयुक्त बयान पर सहमति बनाने में सफलता हासिल की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस पर बातचीत शनिवार तड़के करीब 4 बजे तक चलती रही। यह सहमति इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि ब्रिक्स में ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे देश शामिल हैं, जिनके बीच पश्चिम एशिया और दूसरे राजनीतिक मुद्दों पर कई मामलों में अलग-अलग रुख रहे हैं। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में संघर्ष और तनाव जारी है, भारत ने अलग-अलग रुख रखने वाले देशों के बीच सहमति बनाने के लिए लगातार बातचीत की।

कई संवेदनशील मुद्दों पर था मतभेद

संयुक्त बयान को लेकर कई विवादित मुद्दों पर देशों के बीच मतभेद थे। भारत ने इन अलग-अलग रुख को करीब लाने और ऐसा रास्ता निकालने के लिए लगातार बातचीत की, जिसे सभी सदस्य स्वीकार कर सकें। घंटों चली बातचीत और सलाह-मशवरे के बाद संयुक्त बयान पर सहमति बनी। इससे ब्रिक्स के भीतर अलग-अलग राजनीतिक हितों और विचारों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती भी सामने आती है।

पश्चिम एशिया के मुद्दों के बीच भारत की कोशिश

ब्रिक्स में अब ऐसे कई देश शामिल हैं, जिनकी क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर प्राथमिकताएं एक जैसी नहीं हैं। ईरान, सऊदी अरब और यूएई की मौजूदगी इस विविधता को खास तौर पर दिखाती है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और बढ़े तनाव के बीच इन देशों के अलग-अलग रुख को एक संयुक्त बयान में शामिल करना आसान नहीं था। भारत ने बातचीत का फोकस उन मुद्दों पर बनाए रखने की कोशिश की, जिन पर सदस्य देशों के बीच साझा सहमति बन सकती थी।

दिल्ली में 12-13 सितंबर को 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन

भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कई प्रमुख देशों के राष्ट्राध्यक्ष और वरिष्ठ अधिकारी सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम भी सम्मेलन में शामिल होने वाले नेताओं में हैं।

सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा भी इसमें हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलुपो, नाइजीरिया के उपराष्ट्रपति काशिम शेट्टीमा, वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हुंग और कजाखस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट तोकायेव भी सम्मेलन में मौजूद हैं।

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