
Budget 2026
Budget 2026-27: एजुकेशन सेक्टर को चाहिए बहुत कुछ, क्या पूरी होगी उनकी डिमांड रविवार को देश का केंद्रीय बजट पेश होगा ऐसे में हर इंडस्ट्री की ओर से वित्त मंत्री के समक्ष अपनी बात पहुंचाने का क्रम चल रहा है। कई संगठनों और संस्थानों ने फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण तक अपने मन की बात पहुंचाई है। ऐसे में आज हम बात करते है देश के शिक्षा उद्योग की। क्या है एजुकेशन इंडस्ट्री से जुड़े शिक्षाविदों, एंटरप्रेन्योर और करियर काउंसलर्स की डिमांड, इस पर पेश है पत्रिका डॉट कॉम की ये रिपोर्ट...
देश की मशहूर करियर काउंसलर परवीन मल्होत्रा बजट 2026 से अपेक्षायों पर कहती हैं कि सबसे पहले जरूरत है फंड बढ़ाने की, जैसा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में कहा गया था कि जीडीपी के 6 प्रतिशत के करीब ये होना चाहिए। साथ ही वोकेशनल एजुकेशन, इंटर्नशिप, इंडस्ट्री पार्टनरशिप और जॉब रेडी स्किल्स पर पूरा फोकस रखना चाहिए। उनका कहना है कि स्टूडेंट्स को ईजी लोन, अधिक स्कॉलरशिप्स और ऐड-टेक सर्विस में लगने वाले जीएटी की दरों में बदलाव निहायत आवश्यक है। टीचर्स ट्रेनिंग के लिए बजट के जरिए राशि घोषित होनी चाहिए।
हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय, महेंद्रगढ़ के वाइस चांसलर प्रोफेसर टंकेश्वर कुमार इस बावत बात करते हुए कहते हैं कि साल 2026 के बजट से हम सभी को बहुत सी उम्मीदें हैं। आशा है कि इस बजट में शिक्षा क्षेत्र पर खास ध्यान रहेगा क्योंकि सरकार का लक्ष्य NEP (नेशनल एजुकेशनल पॉलिसी) 2020 को मजबूत करना और युवाओं को स्किल्ड बनाना है। हमें उम्मीद है कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता एवं कौशल आधारित सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। विश्वविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शोध को बढ़ावा मिलेगा। यूनिवर्सिटी लेवल पर मिलने वाली रिसर्च ग्रांट्स से स्टार्टअप कल्चर भी मजबूत होता है। इस दिशा में आगे बढ़ने से हमारा देश दुनियाभर में सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन सकता है, जिसमें आज हम तीसरे नंबर पर हैं।
भारत में शिक्षा संबंधी इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी सरकार का विशेष ध्यान है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में ताकि ज्यादा से ज्यादा बच्चों का भविष्य संवारा जा सके। NEP 2020 के विजन को धरातल पर लागू करने में भी यह बजट कारगर साबित होगा, जिससे हमारे युवा जॉब-रेडी बनेंगे और इससे भारत 'विकसित भारत' की ओर बढ़ेगा। ये बदलाव लंबे समय में भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे। हमें पूरी उम्मीद है कि यह बजट न सिर्फ तुरंत सुधार लाएगा, बल्कि अगले दशक में भारत को शिक्षा के क्षेत्र में विश्वगुरु के तौर पर स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगा।
करियर कोच डॉ. अनिल सेठी का मानना है कि बजट के जरिेए ग्रामीण भारत के युवाओं को सपोर्ट करना बहुत जरूरी है, वहां से कई स्टार्टअप शुरू हो सकते हैं। इससे देश की बड़ी समस्या बेरोजगारी को हल किया जा सकता है। वे आगे कहते हैं कि एजुकेशन के दौरान पर्सनैलिटी डेवलपमेंट पर भी फोकस रखना अत्यंत आवश्यक है। ऐसे में मैनेजमेंट को इस पर फोकस रखना होगा। इसके लिए फंड के लिए सोचना जरूरी है। साथ ही उनका कहना है कि बजट में टीचर्स के लिए पोस्ट रिटायरमेंट फंड की घोषणा होनी चाहिए ताकि समाज को आगे ले जाने वाला बड़ा तबका किसी तरह की इनसिक्योरिटी में न रहे।
बजट 2026 से एजुकेशन इंडस्ट्री को क्या अपेक्षाएं है, इसका जवाब देते हुए ऋषिहुड यूनिवर्सिटी के को-फाउंडर अजय गुप्ता कहते हैं कि शिक्षा को नेशनल इंवेस्टमेंट की तरह देखा जाए, क्योंकि शिक्षित भारत ही सशक्त भारत बनाएगा। वे आगे बताते हैं कि NEP 2020 द्वारा अनुशंसित GDP का 6% हिस्सा शिक्षा को मिले, और इस बार नाममात्र नहीं बल्कि रियल ग्रोथ दिखाई दे। बजट एलोकेशन में आनुपातिक प्राथमिकता रखी जाए, ताकि स्कूल-लेवल एजुकेशन और उच्च शिक्षा दोनों संतुलित रूप से मजबूत हों। समग्र शिक्षा और PM–SHRI जैसे कदमों को और मजबूती मिलनी चाहिए। स्किल-लिंक्ड एजुकेशन को बढ़ावा मिले, क्योंकि आज रोजगार के बाजार में डिग्री के साथ-साथ स्किल्स की बहुत जरूरत होती है।
वे आगे कहते हैं कि डिजिटल डिवाइड को कम करने के लिए शिक्षा के लिए टार्गेटेड इंटरनेट सब्सिडी और लोकल डिजिटल लर्निंग यूनिट पर फोकस किया जाना जरूरी है। शिक्षा बजट का एक हिस्सा इंडस्ट्री-लिंक्ड कोर्स पर भी अपेक्षित है ताकि समाज में प्रचलित 'माउस रेस' रुके। उनकी डिमांड है कि रिक्त शिक्षण पदों (Vacant teaching posts) को भरा जाए ताकि गुणवत्ता आधारित शिक्षा संभव हो। अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन (ECE) के लिए अधिक फंडिंग की जाए। स्मार्ट क्लासरूम और डिजिटल लैब्स का विस्तार किया जाए। साथ ही पब्लिक एजुकेशन में EdTech इंटीग्रेशन के लिए बेहतर फंडिंग हो। AI, डेटा एनालिटिक्स, कोडिंग और रोबोटिक्स को स्कूल करिकुलम में शामिल किया जाए।
वे साफ कहते हैं कि सिर्फ सीट बढ़ाने की बजाय रिसर्च फंडिंग, इंटरनेशनल कोलैबोरेशन और प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग को प्राथमिकता मिले। बजट एलोकेशन और एक्सपेंडिचर के अंतर को खत्म करने के लिए रिजल्ट-ओरिएंटेड फ्रेमवर्क और रियल-टाइम ट्रैकिंग मैकेनिज्म अपनाया जाए ताकि हर रुपया जो शिक्षा पर खर्च हुआ है उसका इम्पैक्ट प्रत्यक्ष तौर पर देखने को मिले।
Updated on:
31 Jan 2026 06:05 pm
Published on:
31 Jan 2026 03:41 pm

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