
कावेरी विवाद पर फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंची DMK (फोटो - आईएएनएस)
Cauvery Water Dispute: कावेरी नदी के पानी को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। डीएमके ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल कर कर्नाटक को तमिलनाडु के हिस्से का कावेरी जल तुरंत छोड़ने का निर्देश देने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) और कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) के आदेश के बावजूद कर्नाटक पानी नहीं छोड़ रहा है। इससे तमिलनाडु के डेल्टा क्षेत्रों में खेती प्रभावित हो रही है और लाखों किसानों के सामने संकट खड़ा हो गया है।
डीएमके ने अपनी याचिका में कहा है कि कावेरी जल विनियमन समिति ने 28 जुलाई को कर्नाटक को प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी बिलीगुंडलू अंतर्राज्यीय सीमा बिंदु तक छोड़ने का निर्देश दिया था। 30 जुलाई को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण ने भी इस फैसले को मंजूरी दी। इसके बावजूद कर्नाटक ने अब तक पानी नहीं छोड़ा।
याचिका में कहा गया है कि 26 जुलाई तक बिलीगुंडलू में करीब 9.46 टीएमसी पानी की कमी हो चुकी है। डीएमके ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि कर्नाटक को अगले 15 दिनों तक प्रतिदिन करीब 7,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश दिया जाए ताकि इस कमी की भरपाई हो सके। साथ ही कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण को पानी छोड़े जाने की निगरानी करने और अदालत में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है।
डीएमके का कहना है कि तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा में करीब 14.9 लाख एकड़ कृषि भूमि सिंचाई के लिए मेट्टूर बांध के पानी पर निर्भर है। इससे करीब 40 लाख किसान और लगभग 1 करोड़ कृषि मजदूर सीधे या परोक्ष रूप से जुड़े हैं। डीएमके का कहना है कि पानी नहीं मिलने से थंजावुर, तिरुवारुर, नागपट्टिनम, मयिलादुथुरै और तिरुचिरापल्ली समेत कई जिलों में कुरुवई की फसल सूखने लगी है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कमजोर रहा है जिससे कावेरी बेसिन में जल प्रवाह कम हुआ है। हालांकि डीएमके का आरोप है कि इसके बावजूद कर्नाटक को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण और कावेरी जल विनियमन समिति के निर्देशों का पालन करना चाहिए था।
Updated on:
1 Aug 2026, 9:41 PM IST
Published on:
1 Aug 2026, 8:44 PM IST
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