
Ministry of Electronics and Information Technology (Image: MeitY)
Online Gaming Rules 2026: 'ऑनलाइन गेमिंग के प्रचार और विनियमन अधिनियम 2026' के लिए केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसके नए नियम 1 मई से प्रभावी होंगे।
नए नियम ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन और विनियमन अधिनियम को संचालित करने के लिए प्रक्रियात्मक ढांचा मुहैया कराते हैं। नए अधिसूचित नियमों के तहत डिजिटल गेमिंग प्राधिकरण का गठन संभव हो सकेगा। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने यह भी कहा है कि जिन ऑनलाइन गेमों में वास्तविक धन का लेन-देन नहीं होता, उनके लिए कोई अनिवार्य पंजीकरण नहीं होगा।
यह कानून अगस्त 2025 में संसद द्वारा पारित PROG अधिनियम के बाद आया है। इसका प्राथमिक उद्देश्य नागरिकों को ऑनलाइन पैसे वाले खेलों से जुड़े जोखिमों से बचाना है, साथ ही ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेमिंग के लिए एक व्यवस्थित को बढ़ावा देना है।
इसके बारे में आईटी सचिव एस कृष्णन ने कहा कि ज्यादातर ऑनलाइन गेम अगर रियल मनी गेम नहीं हैं यानी पैसे का लेनदेन शामिल नहीं है, तो अनिवार्य रूप से पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होगी। निगरानी केवल कुछ विशेष परिस्थितियों में ही शुरू की जाएगी। हालांकि, ‘ईस्पोर्ट्स’ के लिए अनिवार्य पंजीकरण की आवश्यकता होगी।
यहां आपको बता दें कि यह अधिनियम भारत में ईस्पोर्ट्स और ऑनलाइन सोशल गेमिंग को बढ़ावा देता है, लेकिन ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग पर प्रतिबंध लगाता है। मंत्रालय की तरफ से अक्टूबर 2025 में इन नियमों पर सुझाव आमंत्रित किए थे।
केंद्र सरकार की तरफ से जारी अधिसूचना के अनुसार, कानून से संबंधित अपराधों की जांच अधिकारियों में से किसी एक के द्वारा की जाएगी। 1- किसी राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश में साइबर सेल के प्रभारी पुलिस अधिकारी। 2- राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन में कोई भी नोडल साइबर सेल अधिकारी, जिसमें पुलिस स्टेशन, जिला या आयुक्त कार्यालय स्तर के अधिकारी शामिल हैं।
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि कार्यवाही सामान्यतः डिजिटल माध्यम से की जाएगी, और नियमों का पालन न करने पर जुर्माना उल्लंघन की गंभीरता के अनुपात में होगा।
PROG Act का मकसद 'पे-टू-प्ले' मॉडल्स पर रोक लगाना है। यह 21 अगस्त 2025 को संसद में पास हुआ और 22 अगस्त को इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई। यह कानून सभी ऑनलाइन मनी गेमिंग सेवाओं पर रोक लगाता है और इन्हें बढ़ावा देने वालों पर 3 साल तक की जेल और ₹1 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान करता है। ऐसे प्लेटफॉर्म्स का विज्ञापन करने पर 2 साल तक की जेल और ₹50 लाख तक के जुर्माने की सजा हो सकती है।
Updated on:
22 Apr 2026 08:22 pm
Published on:
22 Apr 2026 08:13 pm
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