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‘ICU की जरूरत नहीं थी, एक तरह से डिटेन करने के लिए रखा था’, हाई कोर्ट के फैसले के बाद बोलीं सोनम वांगचुक की पत्नी

Sonam Wangchuk Hospital Shifting: दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल शिफ्ट करने के मामले में आदेश देने के बाद उनकी पत्नी डॉ. गीतांजलि आंगमो ने फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सफदरगंज अस्पताल के प्रति परिवार के मन में भरोसे की कमी थी।
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नई दिल्ली

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Anand Shekhar

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Updated: 21 Jul 2026, 2:57 PM IST

Sonam Wangchuk Wife

डॉ. गीतांजलि जे. अंगमो (ANI)

Sonam Wangchuk: NEET पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर करीब तीन सप्ताह से अधिक समय से अनशन पर बैठे सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश देते हुए वांगचुक को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल से गुड़गांव के प्राइवेट मेदांता अस्पताल में ट्रांसफर करने की इजाजत दे दी है।

दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के कुछ ही देर बाद मीडिया से बात करते हुए सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि आंग्मो ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया और साथ ही सफदरजंग अस्पताल प्रशासन और पुलिस अधिकारियों पर आरोप भी लगाए। उन्होंने दावा किया कि वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल के ICU में रखने की जरूरत नहीं थी, उन्हें वहां एक तरह से डिटेन करके रखा गया था ताकि वह किसी से संपर्क न कर सकें।

सोनम एक तरह से डिटेन करके रखा - गीतांजलि

डॉ. गीतांजलि आंग्मो ने भारत के लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों को बनाए रखते हुए याचिका का सकारात्मक समाधान करने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भारत के हर लोकतांत्रिक नागरिक को अपना डॉक्टर और अस्पताल चुनने का मौलिक अधिकार है। जब सोनम को जंतर-मंतर से लाया गया, तो उनके साथ अस्पताल का स्टाफ नहीं, बल्कि सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी थे।

गीतांजलि ने बताया कि सोनम को ICU में रखा गया, जबकि इसकी कोई मेडिकल जरूरत नहीं थी। ICU के नियमों के अनुसार, मरीज फोन का इस्तेमाल नहीं कर सकते और न ही मिलने आने वाले लोग अंदर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस ले जा सकते हैं। एक तरह से उन्हें वहां एक तरह से डिटेन करके रखा गया था ताकि वह किसी से संपर्क न कर सकें।

निजी डॉक्टरों तक को मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही थी

डॉ. गीतांजलि ने बताया कि कई जन-प्रतिनिधियों, सांसदों और यहां तक कि उन प्राइवेट डॉक्टरों को भी सफदरजंग अस्पताल में सोनम से मिलने की इजाजत नहीं दी गई, जो पिछले तीन हफ्तों से उनका इलाज कर रहे थे। उन्होंने बताया कि डॉ. लांबा और डॉ. दिघे पिछले 20-25 दिनों से लगातार सोनम की जांच कर रहे थे। फिर भी, जब वे सफदरजंग पहुंचे तो पुलिस और प्रशासन ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया।

गीतांजलि ने बताया कि सोनम की सेहत का हाल जानने आए कई सांसदों को प्रवेश द्वार से ही लौटा दिया गया। किसी भी सरकारी अस्पताल में ऐसा कभी नहीं सुना गया कि जिस डॉक्टर ने मरीज का इलाज किया हो, उसे ही अंदर जाने से रोक दिया जाए। इन्हीं वजहों से, सफदरजंग अस्पताल जैसा नहीं, बल्कि कैद जैसा लग रहा था।

सोनम के स्वास्थ्य संबंधी कोई भी समस्या जानलेवा नहीं

सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर जताई जा रही चिंताओं पर उनकी पत्नी ने कहा कि 20 दिनों से ज्यादा समय से चल रहे उपवास के कारण शरीर के कुछ पैरामीटर्स में उतार-चढ़ाव हो सकता है, लेकिन कोई भी समस्या जानलेवा नहीं है। उन्होंने कहा कि मरीज की शारीरिक सेहत उसकी मानसिक स्थिति पर निर्भर करती है। अगर मरीज अपनी पसंद के माहौल में और भरोसेमंद डॉक्टरों की देखरेख में रहता है, तो उसकी हालत तेजी से सुधरती है।

जारी रहेगा अनशन

गीतांजलि ने कहा कि मेदांता अस्पताल में शिफ्ट किए जाने के बावजूद सोनम वांगचुक अपनी भूख हड़ताल जारी रखेंगे। उन्होंने बताया कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं और छात्रों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के विरोध में उन्होंने उपवास जारी रखने का फैसला किया है। यह विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक संसद इस पूरे मामले पर संज्ञान नहीं लेती।