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RIP Junior Mehmood : जूनियर महमूद के जनाजे को बेटे ने दिया कंधा, अपनों को रोता छोड़ गया हंसाने वाला

Junior Mehmood passed away: जूनियर महमूद को आज मुंबई के जुहू में वहां दफनाया दिया गया जहां उनकी मां को दफनाया गया था। उन्होंने 1960 और 1970 के दशक में ब्रह्मचारी, नौनिहाल, गीत गाता चल, मोहब्बत जिंदगी है, परिवार, फरिश्ता समेत कई दर्जन फिल्मों में काम किया। उन्होंने 67 साल की उम्र में आंखिरी सांसें ली।

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Junior Mehmood is died: जूनियर महमूद का इंतकाल बृहस्पतिवार की देर रात 2 बजे टाटा मेमोरियल अस्पताल में हो गया। उन्हें शुक्रवार 8 दिसंबर 2023 को जुमे की नमाज के बाद दफनाया गया। उनके जनाजे में जॉनी लिवर, सचिन पिलगाउंकर और सैलेश लोढ़ा समेत कई कलाकार शामिल हुए। जनाजे में शामिल होने बहुत लोग पहुंचे थे और पूरी सड़क पर लोग ही लोग नजर आ रहे थे। जूनियर महमूद अपने पीछे पत्नी, दो बेटे और एक पोता छोड़ गए।

उनकी इच्छा पर जितेंद्र और सचिन अस्पताल में मिलने पहुंचे थे

बाल कलाकार के रूप में 1960-70 के दशक में मशहूर हुए जूनियर महमूद ने 67 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। जूनियर महमूद के दोस्त सलाम काजी ने उनके निधन की पुष्टि की है। वे कैंसर से जूझ रहे थे। उनका असली नाम नईम सैय्यद था। पिछले कुछ दिनों से उनके बीमारी से जूझने की खबरें आ रही थीं। उन्होंने अपने बचपन के दोस्त सचिन पिलगाउंकर और जितेंद्र से मिलने की इच्छा जताई थी। जितेंद्र उनसे मिलने मुंबई के टाटा मेमोरिल अस्पताल में गए भी थे जहां उनका इलाज चल रहा था। उन्हें देखकर दोनों की आंखें छलछला उठी।

इस गाने से दर्शकों के दिलों पर छा गए थे जूनियर

जूनियर महमूद हास्य अभिनेता महमूद को अपना गुरु मानते थे। जूनियर ने यूं तो कई फिल्मों में हास्य बाल कलाकार के रूप में काम किया लेकिन उनपर फिल्माया गाया गाना हम काले हैं तो क्या हुआ, दिलवाले हैं... ने तो उन्हें दर्शकों के दिलों में सदा के लिए बसा दिया। दरअसल इस गाने को जूनियर महमूद ने रिक्रिएट किया था और यह इतना हिट हुआ था कि खुद राजश्री भी उनके टैलेंट की दीवानी हो गई थीं। जूनियर महमूद ने इस गाने में महमूद की तरह ही लूंगी और बनियान पहन रखी थी और उन्हीं की तरह ठुमके भी लगाए थे। वह जब पर्दे पर आते तो दर्शकों के चेहरों पर खुद ही मुस्कान आ जाती।

अंतिम इच्छा... मुझे एक अच्छे इंसान के रूप में याद करना

जूनियर ने अपनी आखिरी इच्छा यह बताई थी कि लोग उन्हें मरने के बाद अच्छे इंसान के रूप में याद करे। उन्होंने कहा था कि अगर आपके मरने के बाद चार लोग आपको अच्छे इंसान के रूप में याद करे तो समझिए आपका जीवन सफल हो गया। उनकी यादगार फिल्मों में ब्रह्मचारी, कारवां, हाथी मेरे साथी, बॉम्बे टू गोवा, जोहर महमूद इन हांगकांग, बचपन आदि रहीं।

कई तरह के कैंसर से जूझ रहे थे जूनियर

उनकी मौत की खबर पर उनके सबसे करीबी दोस्त सलमान काजी बुरी तरह से टूट गए। काजी ने बताया कि करीब दो महीने पहले उन्हें समस्या हुई और फिर अचानक से उनका वजन कम होना शुरू हो गया। रिपोर्ट आने पर पता चला कि उन्हें फेफड़े और लीवर का कैंसर था। उनके पेट में ट्यूमर भी था। उन्हें पीलिया की भी समस्या थी। एक हास्य अभिनेता का इस तरह दुनिया से जाना उनके दर्शकों को रूला गया।

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