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Constitution amendment Bill: 30 दिन जेल में रहे तो PM-CM भी गंवा सकते हैं पद? संविधान संशोधन बिल पर इमरान मसूद ने उठाए सवाल

प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को 30 दिन की न्यायिक हिरासत के बाद पद से हटाने वाले प्रस्तावित संविधान संशोधन विधेयक पर कांग्रेस सांसद Imran Masood ने कड़ी आपत्ति जताई। जानिए उन्होंने लोकतंत्र और कानून को लेकर क्या सवाल उठाए।
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Congress MP Imran Masood on Constitution amendment Bill.

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद (Photo- ANI)

Congress MP Imran Masood on PM-CM removal over 30-day jail: कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रस्तावित संविधान संशोधन विधेयक की तीखी आलोचना की है, जिसमें प्रावधान किया गया है कि यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री किसी गंभीर आपराधिक मामले में लगातार 30 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहते हैं तो उन्हें स्वतः पद से हटा दिया जाएगा। इस संबंध में उन्होंने कहा, यह प्रावधान लोकतंत्र को कमजोर कर सकता है, क्योंकि किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि को अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने से पहले केवल गिरफ्तारी के आधार पर पद से हटाया जा सकता है।

उन्होंने कहा, यदि किसी के खिलाफ केवल मामला दर्ज कराकर उसे गिरफ्तार किया जा सकता है, तो फिर कानून का क्या मतलब रह जाता है? यदि सिर्फ केस दर्ज कर, गिरफ्तारी करके किसी को पद से हटा दिया जाएगा, तो लोकतंत्र कहां बचेगा?

उन्होंने प्रस्तावित कानून के दायरे पर सवाल उठाते हुए सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री को गिरफ्तार किया जा सकता है? उन्होंने आगे कहा, देश में इस तरह के कदम उठाकर आप लोकतंत्र को नष्ट कर रहे हैं। जब तक सभी अन्य विकल्प समाप्त न हो जाएं, तब तक ऐसे कदम नहीं उठाए जाने चाहिए।

क्या है संविधान विधेयक 2025?

संविधान (130वां संशोधन) विधेयक अगस्त 2025 में लोकसभा में पेश किया गया था। इस विधेयक के अनुसार, यदि देश के प्रधानमंत्री, किसी राज्य के मुख्यमंत्री या केंद्र अथवा राज्य सरकार के किसी मंत्री को किसी गंभीर आपराधिक मामले में गिरफ्तार किया जाता है और वे लगातार 30 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहते हैं, तो उन्हें 31वें दिन पद से हटा दिया जाएगा।

वर्तमान में लागू जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत किसी जनप्रतिनिधि की अयोग्यता सामान्य तौर पर अदालत द्वारा सजा के बाद ही लागू होती है।

प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य गिरफ्तारी और दोषसिद्धि के बीच की अवधि के लिए कानूनी व्यवस्था करना है। सरकार का तर्क है कि इससे जेल से शासन चलाने जैसी स्थिति को रोका जा सकेगा और संवैधानिक पदों की गरिमा भी बनी रहेगी। फिलहाल यह विधेयक संयुक्त संसदीय समिति के विचाराधीन है और अभी कानून नहीं बना है।

भाजपा ने इस प्रस्तावित संशोधन का समर्थन किया है। भाजपा का कहना है कि राजनीति के अपराधीकरण को समाप्त करने और लोकतांत्रिक गरिमा बनाए रखने के लिए यह सुधार आवश्यक है।

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