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Congress: सांसद नीरज डांगी को कांग्रेस ने राज्यसभा में बनाया चीफ व्हिप, जानिये कौन हैं ये वरिष्ठ नेता

Congres Rajya Sabha Chief Whip: कांग्रेस ने राज्यसभा सांसद नीरज डांगी को राज्यसभा में पार्टी का चीफ व्हिप नियुक्त किया है। जानिए राजस्थान के वरिष्ठ नेता नीरज डांगी का राजनीतिक सफर, यूथ कांग्रेस से राज्यसभा तक का सफर और नई जिम्मेदारी।
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भारत

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Anurag Animesh

Aug 06, 2026

Neeraj Dangi news

कांग्रेस सांसद नीरज डांगी बनें राज्यसभा में पार्टी के चीफ व्हिप

Who Is Neeraj Dangi: कांग्रेस ने राज्यसभा सांसद नीरज डांगी को राज्यसभा में पार्टी का चीफ व्हिप नियुक्त किया है। पार्टी नेतृत्व ने उन्हें यह जिम्मेदारी संसदीय रणनीति को मजबूत करने के उद्देश्य से सौंपी है। अब नीरज डांगी सदन में कांग्रेस सांसदों के बीच समन्वय स्थापित करने, पार्टी की रणनीति के अनुरूप उपस्थिति और मतदान सुनिश्चित कराने तथा संसदीय कार्यों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इस संबंध में कांग्रेस की ओर से एक लेटर जारी किया गया है।

कौन हैं नीरज डांगी?

नीरज डांगी राजस्थान से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद हैं। उन्हें 2020 में पहली बार राज्यसभा भेजा गया था। इसके बाद 2026 के राज्यसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया और वे दोबारा राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए।

अशोक गहलोत के करीबी नेताओं में होती है गिनती

नीरज डांगी की पहचान कांग्रेस के दलित नेताओं में होती है। पार्टी संगठन में उनकी साफ-सुथरी और ईमानदार छवि मानी जाती है। उन्हें राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का करीबी नेता भी माना जाता है।

राजनीति विरासत में मिली

नीरज डांगी को राजनीति विरासत में मिली है। उनके पिता दिनेश डांगी राजस्थान सरकार में मंत्री रह चुके हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल में दलित समाज के अधिकारों और उनके उत्थान के लिए काम किया। पिता से प्रेरित होकर नीरज डांगी ने छात्र जीवन से ही सक्रिय राजनीति में कदम रखा। नीरज डांगी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत यूथ कांग्रेस से की। संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने के बाद साल 2002 में उन्हें राजस्थान यूथ कांग्रेस का उपाध्यक्ष बनाया गया।

विधानसभा चुनावों में मिली हार

कांग्रेस ने साल 2003 के विधानसभा चुनाव में उन्हें देसूरी सीट से उम्मीदवार बनाया, लेकिन वे चुनाव नहीं जीत सके। इसके बाद 2008 में रेवदर विधानसभा सीट से भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हालांकि चुनावी हार के बावजूद पार्टी ने उन पर भरोसा बनाए रखा और 2009 में उन्हें राजस्थान यूथ कांग्रेस का प्रदेशाध्यक्ष नियुक्त किया। बाद में 2014 में वे राजस्थान कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता और प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के महासचिव बने। वे ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के सदस्य भी रहे। साल 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर उन्हें रेवदर से उम्मीदवार बनाया था। लेकिन इस बार भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।