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लकवाग्रस्त मां का ख्याल रखना बन गया था बोझ, कलयुगी बेटे ने चार मंजिला इमारत की छत से नीचे फेंका

बेंगलुरु में एक व्यक्ति ने अपनी लकवाग्रस्त मां को छत से धक्का देकर मार डाला। पुलिस के अनुसार आरोपी अपनी मां की देखभाल करने में असमर्थ था और इसी वजह से उसने यह कदम उठाया।

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भारत

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Himadri Joshi

Apr 17, 2026

Crime News

बेटे ने मां को छत से फेंक कर ली जान (फोटो- Hate Detector एक्स पोस्ट)

कर्नाटक के बेंगलुरु में रिश्तों को शर्मसार करने वाला एक दर्दनाक मामला सामने आया है। यहां एक कलयुगी बेटे ने सेवा करने से परेशान होकर अपनी लकवाग्रस्त मां की हत्या कर दी। 42 वर्षीय बेटे के अनुसार वह मां को इस स्थिति में परेशान होते हुए देख नहीं पा रहा था और साथ ही उनकी सेवा करने में भी असमर्थ था इसी के चलते उसने अपनी 75 वर्षीय लकवाग्रस्त मां को छत से धक्का देकर मौत के घाट उतार दिया।

मां को उठाकर छत पर ले गया और धक्का दे दिया

यह घटना बुधवार की बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार आरोपी अपनी मां को उठाकर चार मंजिला इमारत की छत पर ले गया और वहां से नीचे धक्का दे दिया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शुरुआती जांच के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है।

चार-पांच साल से लकवाग्रस्त थी मां

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी एक सेल्स एग्जीक्यूटिव के रूप में काम करता था और बेंगलुरु के आरआर नगर स्थित बीईएमएल लेआउट में किराए के मकान में अपने परिवार और मां के साथ रहता था। उसकी मां पिछले चार से पांच साल से लकवा की बीमारी से पीड़ित थीं और पूरी तरह बिस्तर पर निर्भर थीं।

पुलिस पूछताछ के दौरान कबूल किया गुनाह

आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह अपनी मां को रोजाना इस हालत में देखकर मानसिक रूप से टूट चुका था। उसने कहा कि वह उनकी देखभाल करने में खुद को असमर्थ महसूस करता था और इसी वजह से उसने यह खौफनाक कदम उठाया। पुलिस इस बयान की सच्चाई और अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।

पुलिस कर रही मामले की जांच

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि इस घटना में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी। पुलिस आसपास के लोगों और परिवार के सदस्यों से भी पूछताछ कर रही है। इस घटना ने एक बार फिर बुजुर्गों की देखभाल और मानसिक स्वास्थ्य जैसे गंभीर मुद्दों को सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में परिवारों को भावनात्मक और सामाजिक सहयोग की जरूरत होती है ताकि इस तरह की त्रासदी को रोका जा सके।