
दलाई लामा के जन्म दिन पर शिमला के दोरजे ड्रेक मठ में प्रार्थना और अनुष्ठान करते तिब्बती बौद्ध और इनसेट में दलाई लामा ( फोटो : ANI)
Dalai Lama Birthday Special Some Interesting Facts : नोबेल शांति पुरस्कार विजेता तिब्बती बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा चीन के बजाय भारत में बहुत लोकप्रिय हैं। आज उनके जन्म दिन पर दीर्घायु होने की कामना में शिमला के दोरजे ड्रेक मठ में सुबह से ही प्रार्थनाएं और अनुष्ठान शुरू हो गए, इसके बाद केक का अर्पण किया गया। उन्हें प्राचीन भारतीय बौद्ध दर्शन का संरक्षक और एक सम्मानित अतिथि माना जाता है। ध्यान रहे कि वे सन 1959 में उत्पीड़न से बच कर आने के बाद दशकों से भारत के धर्मशाला में निर्वासित जीवन बिता रहे हैं। उन्हें 80,000 से अधिक शरणार्थियों के साथ भारत में निर्वासन में भागने के लिए मजबूर होना पड़ा। आइए उनसे संबंधित खास बातें जानते हैं।
दलाई लामा को प्राचीन नालंदा परंपरा के खोया हुआ ज्ञान संरक्षित करने और उसे उपमहाद्वीप में वापस लाने के लिए बहुत इज्जत की नजर से देखा जाता है। उनका जन्मदिन हर साल 6 जुलाई को मनाया जाता है, जो दुनिया भर के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है।
दलाई लामा 6 जुलाई, 1935 को ल्हामो धोन्डुप के रूप में जन्मे, उनका पूरा धार्मिक नाम बहुत लंबा है—जेत्सुन जम्फेल नवांग लोबसांग येशे तेनजिन ग्यात्सो। दो वर्ष की आयु में, उन्हें 13वें दलाई लामा के पुनर्जन्म के रूप में पहचाना गया और अक्टूबर 1939 में उन्हें ल्हासा लाया गया, जिसके बाद 22 फरवरी 1940 को उन्हें औपचारिक रूप से तिब्बत राज्य के प्रमुख के रूप में स्थापित किया गया। छह वर्ष की आयु में तेनजिन ग्यात्सो नाम से जाने जाने वाले दलाई लामा का 17 नवंबर 1950 को नोरबुलिंगका पैलेस में आयोजित एक समारोह में आधिकारिक तौर पर तिब्बत के लौकिक नेता के रूप में सिंहासनारोहण किया गया।
दलाई लामा की वेबसाइट के अनुसार, 6 जुलाई, 1935 को तिब्बत के तकस्टर में एक छोटे से किसान परिवार में जन्मे, उनका मूल नाम ल्हामो थोंडुप था, जिसका शाब्दिक अर्थ है 'इच्छा पूरी करने वाला इष्ट देव।'
दलाई लामा पर्यावरण से संबंधित चिंताओं के लिए सम्मानित होने वाले पहले नोबेल पुरस्कार विजेता रहे, जिन्होंने 1989 में नोबेल शांति पुरस्कार मिला। तिब्बती परंपरा में दलाई लामा को करुणा के बोधिसत्व अवलोकितेश्वर का अवतार माना जाता है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार निर्वासित तिब्बती बौद्ध भिक्षुओं ने हिमाचल प्रदेश के शिमला स्थित दोरजे ड्रेक मठ में 14वें दलाई लामा के 91वें जन्मदिन के अवसर पर विशेष प्रार्थनाएं कीं । मठवासी समुदाय और निवासी सुबह-सुबह धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने के लिए एकत्रित हुए और उनके दीर्घायु होने के लिए कामना की।
रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय तिब्बती प्रशासन की ओर से उनके जन्म दिन पर हर साल आयोजित होने वाला यह वार्षिक कार्यक्रम दुनिया भर के अनुयायियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस वर्ष मुख्य सार्वजनिक मंच से उनकी शारीरिक अनुपस्थिति पर प्रकाश डालते हुए, उनके कार्यालय ने बताया कि वे जून की शुरुआत में दिल्ली गए थे ताकि उनके बांये घुटने का प्रत्यारोपण ऑपरेशन करवाया जा सके, जो गर्मियों के दौरान लद्दाख क्षेत्र में उनके निर्धारित प्रवास से पहले हुआ था।
तिब्बती बौद्ध भिक्षु दावा त्सेरिंग ने कहते हैं, 'आज एक महत्वपूर्ण दिन है, परम पावन दलाई लामा का जन्मदिन। उनका जन्मदिन पूरी दुनिया में मनाया जाता है, और हम भी इसे यहां मना रहे हैं।'
स्थानीय तिब्बती निवासी तेनजिन चेमी ने कहते हैं, 'आज परम पावन 14वें दलाई लामा का 91वां जन्मदिन है। हम (तिब्बती), विशेष रूप से भारत और दुनिया भर में निर्वासन में रहने वाले, निर्वासन में हैं। वे हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण और शांति के समर्थक हैं। हम तिब्बती लोगों के लिए वे गुरु और एक तरह से भगवान व अवतार हैं।'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर लाई लामा को उनके 91वें जन्मदिन पर बधाई दी और शांति के उनके संदेश को विश्व के लिए "मार्गदर्शक शक्ति" बताया।
इसके उलट चीन की कम्युनिस्ट सरकार दलाई लामा को अलगाववादी मानती है और उनकी तस्वीरों और शिक्षाओं पर सख्त पाबंदियां लगाती है। चीनी अधिकारी सरकार के प्रति वफादारी सुनिश्चित करने के लिए तिब्बती बौद्ध धर्म पर कड़ा नियंत्रण रखते हैं; यही कारण है कि वे दलाई लामा से नफरत करते हैं ( इनपुट: ANI)
Updated on:
06 Jul 2026 11:56 am
Published on:
06 Jul 2026 11:56 am
