
दिल्ली विधानसभा की सुरक्षा में चूक
Delhi Assembly Security: दिल्ली विधानसभा परिसर में सोमवार को एक बड़ी सुरक्षा भंग की घटना ने पूरे सुरक्षा तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए। एक अज्ञात व्यक्ति ने मास्क लगाए हुए SUV कार से गेट नंबर 2 की लोहे की बैरियर को तोड़कर जबरन अंदर घुस लिया। कार उत्तर प्रदेश रजिस्ट्रेशन नंबर वाली थी। व्यक्ति स्पीकर विजेंद्र गुप्ता के कार्यालय की ओर बढ़ा, वहां स्पीकर की गाड़ी पर स्याही फेंकी और फूलों का गुच्छा रखकर तेजी से भाग निकला। घटना में कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था की मजबूती पर गंभीर सवाल उठ गए हैं।
दिल्ली पुलिस ने तुरंत कार को बरामद कर लिया और जांच शुरू कर दी है। बम स्क्वॉड और सुरक्षा कर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे। प्रारंभिक रिपोर्ट्स के अनुसार, व्यक्ति ने कुछ मिनट परिसर में रहकर अपना काम किया और भाग निकला। यह घटना दोपहर करीब 2 बजे की बताई जा रही है।
अब सवाल यह है कि दिल्ली विधानसभा जैसी संवेदनशील जगह की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसके पास है? विशेषज्ञों और रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली विधानसभा की सुरक्षा की मुख्य जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस के पास है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सिक्योरिटी यूनिट हाई-प्रोफाइल सरकारी इमारतों, विधानसभा, मंत्रालयों आदि की सुरक्षा संभालती है। यह यूनिट गृह मंत्रालय (केंद्र सरकार) के अधीन काम करती है, इसलिए सुरक्षा संबंधी बड़े फैसले केंद्र स्तर पर ही होते हैं।
सामान्य दिनों में दिल्ली पुलिस के जवान विधानसभा के गेट्स, परिसर और आसपास तैनात रहते हैं। हाई रिस्क स्थितियों जैसे बजट सत्र, महत्वपूर्ण बहस या विरोध प्रदर्शन के दौरान अर्ध-सैनिक बलों जैसे CRPF को अतिरिक्त तैनाती के लिए बुलाया जाता है। विधानसभा सचिवालय की अपनी सीमित सुरक्षा स्टाफ होती है, लेकिन मुख्य सुरक्षा व्यवस्था दिल्ली पुलिस पर निर्भर करती है। दिल्ली पुलिस की सिक्योरिटी यूनिट में कुल 6800 से अधिक जवान हैं, जो राष्ट्रपति भवन, संसद, प्रधानमंत्री आवास सहित कई महत्वपूर्ण स्थानों की सुरक्षा करते हैं।
घटना ने सुरक्षा प्रोटोकॉल की कमियों को उजागर किया है। गेट पर बैरियर तोड़ने जैसी घटना को रोकने के लिए पर्याप्त फिजिकल और टेक्नोलॉजिकल सुरक्षा (जैसे ऑटोमैटिक बूम बैरियर, CCTV मॉनिटरिंग, वाहन स्कैनिंग) पर सवाल उठ रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने मामले को गंभीर सुरक्षा भंग मानते हुए जांच शुरू कर दी है और आसपास के इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता के कार्यालय से जुड़ी इस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली जैसी राजधानी में विधानसभा की सुरक्षा को और अधिक पुख्ता बनाने की जरूरत है, क्योंकि यह न सिर्फ विधायकों बल्कि लोकतंत्र का प्रतीक भी है।
Published on:
06 Apr 2026 07:00 pm
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