
Chhath festival
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में छठ पूजा (Chhath Puja) को लेकर घमासान मचा हुआ है। पिछले महीने ही दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) ने यमुना के किनारे, सार्वजनिक स्थलों और मंदिरों में छठ पर्व मनाने पर रोक लगाने का फैसला किया था। इस फैसले के बाद से दिल्ली में आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) और बीजेपी (BJP) के बीच पूर्वांचलियों का असली हितैषी होने का श्रेय लेने की होड़ शुरू हो गई। दिल्ली बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और सांसद मनोज तिवारी इस फैसले के विरोध में पूरी दिल्ली में छठ रथ यात्रा निकाल कर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसमें वह घायल भी हो गए हैं। छठ पूजा को लेकर सियासी खींचतान के बीच आप सरकार ने 10 नवंबर को छुट्टी का ऐलान किया है।
छठ घाटों पर बजट की व्यवस्था
बता दें कि दक्षिणी दिल्ली के महापौर मुकेश सूर्यान ने बताया था कि छठ के लिए क्षेत्र के हर वार्ड में 40 हजार रुपए तक खर्च करने की व्यवस्था की गई है। एक वार्ड में अधिकतम दो छठ घाट होंगे और एक छठ घाट पर 20 हजार रुपये तक खर्च किए जाएंगे। इन छठ घाटों पर ये राशि नगर निगम खर्च करेगा। नगर निगम के इंजीनियरिंग विभाग द्वारा छठ घाटों पर इस बजट के जरिये व्यवस्था की जाएगी।
दिल्ली सरकार की ये है तर्क
दिल्ली सरकार के मंत्री गोपाल राय ने कहा कि केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य विभाग और एक्सपर्ट की राय गाइडलाइन जारी की थी कि सबसे ज्यादा कोरोना वायरस पानी के कनेक्शन से फैलता है। छठ पूजा पानी में खड़ा होकर की जाती है। इसलिए केंद्र सरकार की तरफ से पिछली बार गाइडलाइन दी गई थी कि घर में रह करके लोग पूजा करें, जबकि भारतीय जनता पार्टी छठ पूजा को लेकर के राजनीति करने की कोशिश कर रही है। भाजपा को पूर्वांचलियों के सम्मान की चिंता कभी नहीं थी और ना आज है। भाजपा राजनीति इसलिए कर रही है उसे लग रहा है कि एमसीडी चुनाव में डूबते को तिनके का सहारा शायद मिल जाए।
Published on:
06 Nov 2021 08:41 am
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