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दिल्ली-NCR के प्रदूषण पर केंद्र सख्त: ‘रिजल्ट दो या कार्रवाई झेलो’, राजस्थान-पंजाब के लिए नया फरमान

दिल्ली-NCR की जहरीली हवा पर केंद्र सरकार ने कड़ा एक्शन लिया है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने पंजाब और राजस्थान को साफ चेतावनी दी है कि अब प्रदूषण पर टालमटोल नहीं चलेगी। 'रिजल्ट' न मिलने पर अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी। जानें क्या है सरकार का नया मास्टरप्लान।

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Bhupender Yadav

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव मंगलवार, 6 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए राजस्थान और पंजाब की कार्ययोजनाओं पर एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए। (फोटो: IANS/X/@byadavbjp)

Delhi-NCR Pollution:दिल्ली-एनसीआर में सालभर बनी रहने वाली खराब वायु गुणवत्ता पर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि प्रदूषण नियंत्रण में अब टालमटोल नहीं चलेगी और परिणाम नहीं आए तो जवाबदेही तय की जाएगी। दिल्ली-एनसीआर से सटे राजस्थान और पंजाब के एक्शन प्लान की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उन्होंने हर क्षेत्र के लिए अलग, व्यावहारिक और समयबद्ध कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया। मंत्री ने निर्देश दिए कि वायु प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े एक्शन प्लान की समीक्षा अब हर महीने मंत्रिस्तरीय स्तर पर होगी, ताकि क्रियान्वयन की प्रगति और असर साफ नजर आए।

राजस्थान: ई-बसें, पार्किंग व सड़क सुधार पर फोकस

राजस्थान के एक्शन प्लान की समीक्षा में मंत्री यादव ने अलवर, भिवाड़ी, नीमराना और भरतपुर में सार्वजनिक परिवहन की कमजोरियों पर चिंता जताई। उन्होंने इलेक्ट्रिक बसों की खरीद के लिए समयबद्ध प्रस्ताव लाने और शहरी क्षेत्रों के साथ राष्ट्रीय राजमार्गों व एक्सप्रेसवे पर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मिशन मोड में विकसित करने के निर्देश दिए। भिवाड़ी-नीमराना में सड़क किनारे ट्रकों की अनियोजित पार्किंग को गंभीर समस्या बताते हुए व्यवस्थित पार्किंग स्थल चिह्नित करने, सड़क पुनर्विकास, जाम वाले स्थानों की पहचान और पुराने कचरे के निपटान की व्यापक योजना बनाने को कहा गया।

उद्योगों पर सख्ती व पंजाब में पराली पर नए उपाय

मंत्री ने निर्देश दिए कि जिन औद्योगिक इकाइयों ने ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली नहीं लगाई है, उन्हें तत्काल बंद करने के नोटिस जारी हों। पंजाब के एक्शन प्लान पर उन्होंने पराली प्रबंधन के लिए सभी मशीनों की कार्यशीलता सुनिश्चित करने और नए प्रभावी उपाय अपनाने पर जोर दिया। पेलेटाइजेशन संयंत्रों को बढ़ावा देने, फसल अवशेषों के उपयोग को थर्मल पावर प्लांट व ईंट-भट्टों तक विस्तार देने और कम्प्रेस्ड बायो गैस संयंत्रों को पर्यावरण-अनुकूल समाधान के रूप में अपनाने के निर्देश दिए गए। पराली जलाने पर रोक के लिए ड्रोन आधारित निगरानी को भी प्रोत्साहित किया गया।