30 अप्रैल 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

स्कूल खुले, पर किताबें अब भी गायब, दिल्ली में 10 लाख बच्चों की पढ़ाई ठप, हाईकोर्ट ने अपनाया सख्त रुख

दिल्ली के सरकारी स्कूलों में नया सत्र शुरू, लेकिन 10 लाख बच्चों को किताबें नहीं मिलीं। हाईकोर्ट का सख्त रुख, कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा। बच्चे अभी भी पुरानी किताबों पर निर्भर है।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Ankit Sai

Apr 30, 2026

delhi school book delay

10 लाख बच्चों को किताबें नहीं मिलीं (AI Photo)

Delhi School Book Delay: देश की राजधानी दिल्ली में सरकारी स्कूलों (Delhi Government School) में नया सत्र शुरू हुए कई हफ्ते हो गए हैं, लेकिन अभी तक लाखों बच्चों के हाथ अब तक किताबें (BOOK) नहीं पहुंची हैं। ऐसे में पढ़ाई का पूरा सिस्टम ही लड़खड़ा गया है। इसी गंभीर मुद्दे पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सरकार को जवाब देने को कहा है। दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले को लेकर अवमानना याचिका दायर की गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया। जस्टिस सचिन दत्ता ने देरी को लेकर नाराजगी जताई और पूछा कि आखिर इतने बड़े स्तर पर किताबें बांटने में इतनी देर क्यों हो रही है।

छुट्टियों से पहले किताबें दे दी जाएंगी

सरकार की तरफ से पेश वकील ने कोर्ट को भरोसा दिया कि सभी छात्रों को गर्मी की छुट्टियों से पहले किताबें दे दी जाएंगी। कोर्ट ने इस आश्वासन को रिकॉर्ड में लेते हुए सरकार को स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी।

कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को किताबें नहीं मिली

यह याचिका सोशल जूरिस्ट नाम की संस्था की ओर से दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता के वकील अशोक अग्रवाल ने कोर्ट को बताया कि पहले भी सरकार ने समय पर किताबें देने का वादा किया था, लेकिन इस बार भी कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को किताबें नहीं मिली हैं। याचिका में कहा गया है कि यह सीधे तौर पर कोर्ट के पहले दिए गए आदेशों की अनदेखी है। करीब 10 लाख छात्रों को किताबें देने को लेकर पहले भी स्पष्ट निर्देश दिए गए थे, लेकिन उनका पालन नहीं हुआ।

पुरानी किताबों से काम चलाने को मजबूर बच्चे

कई स्कूलों में बच्चे पुरानी या शेयर की गई किताबों से पढ़ने को मजबूर हैं। जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। और बच्चों का हक भी कमजोर पड़ रहा है। यह मामला शिक्षा के अधिकार कानून और संविधान के तहत मिले अधिकारों से भी जुड़ा है, जो हर बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा की गारंटी देता है।

पुराने वादे, नई देरी

याचिका में यह भी बताया गया है कि अप्रैल 2024 और जुलाई 2024 में कोर्ट के सामने सरकार ने भरोसा दिया था कि किताबों की खरीद और वितरण समय पर होगा। इसके बावजूद 1 अप्रैल से शुरू हुए नए सत्र के कई हफ्ते बीत जाने के बाद भी बच्चों को जरूरी किताबें नहीं मिल पाईं। इस देरी ने सरकारी स्कूलों की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पढ़ाई पर सीधा असर, बढ़ रही असमानता

किताबें नहीं मिलने से सबसे ज्यादा नुकसान छोटे बच्चों की पढ़ाई को हो रहा है। बुनियादी शिक्षा की शुरुआत में ही रुकावट आना आगे के सीखने पर असर डाल सकता है। याचिका में यह भी कहा गया है कि सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के बीच का अंतर और बढ़ रहा है। जहां प्राइवेट स्कूलों में बच्चे समय पर पढ़ाई शुरू कर चुके हैं, वहीं सरकारी स्कूलों के छात्र अभी भी इंतजार में हैं।