
डोनाल्ड ट्रंप और पुतिन के बीच फोन पर हुई बातचीत (Photo-IANS)
Nuclear Stockpile: मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच अब सबसे बड़ा सवाल ईरान के उस 11 टन समृद्ध यूरेनियम (Enriched Uranium) को लेकर खड़ा हो गया है, जिसका ठिकाना साफ नहीं है। यही न्यूक्लियर भंडार (Nuclear Stockpile) इस पूरे संकट की असली जड़ बनता जा रहा है। करीब 90 मिनट चली फोन बातचीत में डॉनल्ड ट्रम्प और पुतिन के बीच ईरान का मुद्दा प्रमुख रहा। ट्रंप ने दावा किया कि पुतिन ने ईरान के यूरेनियम को हटाने में मदद की पेशकश की थी। हालांकि ट्रंप ने इसे ठुकराते हुए कहा कि रूस को पहले यूक्रेन युद्ध खत्म करने पर ध्यान देना चाहिए। इस बातचीत ने साफ कर दिया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम अब सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति का केंद्र बन चुका है।
पिछले 8 सालों में ईरान ने करीब 22,000 पाउंड यानी 11 टन समृद्ध यूरेनियम जमा कर लिया है। लेकिन सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह स्टॉक आखिर रखा कहां है। इसका बड़ा हिस्सा इस्फहान के न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स में हो सकता है। यह वही जगह है जिस पर पिछले साल और इस साल हवाई हमले हुए थे। अन्तरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा अभिकरण (IAEA) के प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी (Rafael Grossi) के अनुसार, सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिलते हैं कि साल 2025 के युद्ध के दौरान भी यह यूरेनियम वहीं मौजूद था। लेकिन एजेंसी अब तक इसकी पुष्टि नहीं कर पाई है।
यूरेनियम का इस्तेमाल दो तरह से होता है। कम शुद्धता पर यह बिजली बनाने में काम आता है, लेकिन ज्यादा शुद्ध होने पर यह परमाणु हथियार का आधार बन जाता है। IAEA के मुताबिक, ईरान के पास 60% तक समृद्ध 440.9 किलोग्राम यूरेनियम है। यह स्तर हथियार बनाने के लिए जरूरी 90% के काफी करीब है। एक बार यूरेनियम 20% से ऊपर पहुंच जाए, तो उसे 90% तक ले जाना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है। यही वजह है कि दुनिया भर में चिंता बढ़ रही है।
साल 2015 में अमेरिका और पांच अन्य देशों ने ईरान के साथ एक परमाणु समझौता किया था, जिसमें यूरेनियम की शुद्धता और मात्रा सीमित कर दी गई थी। लेकिन साल 2018 में ट्रम्प ने अमेरिका को इस समझौते से बाहर कर लिया। इसके बाद ईरान ने धीरे-धीरे तय सीमा से ऊपर यूरेनियम समृद्ध करना शुरू कर दिया। साल 2021 तक यह स्तर 20% पहुंच गया और बाद में 60% तक चला गया।
2025 में अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान ने IAEA के साथ सहयोग रोक दिया। इससे उसके परमाणु ठिकानों की निगरानी लगभग खत्म हो गई। अब एजेंसी केवल सैटेलाइट के जरिए ही हालात पर नजर रख पा रही है। ऐसे में 11 टन यूरेनियम का सटीक स्थान और स्थिति दोनों ही रहस्य बने हुए हैं।
Updated on:
30 Apr 2026 04:35 pm
Published on:
30 Apr 2026 04:33 pm
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