
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर किया बड़ा दावा (Photo-IANS)
Nuclear Issue: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता भले ही अटक गई हो, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ एक बार फिर बड़े सैन्य कदम उठाने की तैयारी में हैं। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच अनिश्चितकालीन सीजफायर पर सहमति के बावजूद, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई के लिए एक नया प्लान तैयार किया है। सेंटकॉम के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ट्रंप को इन नए सैन्य विकल्पों पर ब्रीफिंग देंगे। सूत्रों के अनुसार, ट्रंप शांति वार्ता में आए इस गतिरोध को तोड़ने या युद्ध खत्म करने से पहले ईरान को 'आखिरी झटका' देने के लिए बड़े सैन्य अभियानों को फिर से शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। ट्रंप का मानना है कि यह परमाणु मुददे को लेकर ईरान को झुकने पर मजबूर कर देगा।
सेंटकॉम ईरान पर दबाव बनाने के लिए तीन मुख्य सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है:
बुनियादी ढांचे पर हवाई हमला: पहला प्लान ईरान के महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर पर "छोटे और शक्तिशाली" हवाई हमले करने का है। अमेरिका को उम्मीद है कि बमबारी से ईरान बातचीत की मेज पर आने को मजबूर होगा। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि नागरिक बुनियादी ढांचे को नष्ट करना 1949 के जिनेवा कन्वेंशन के तहत 'युद्ध अपराध' माना जा सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर कब्जा: दूसरा विकल्प होर्मुज जलडमरूमध्य के एक हिस्से पर नियंत्रण हासिल करना है, ताकि इसे वाणिज्यिक जहाजों के लिए फिर से खोला जा सके। इस बड़े ऑपरेशन में अमेरिकी जमीनी सेना की तैनाती करनी पड़ सकती है।
यूरेनियम भंडार को जब्त करना: तीसरा विकल्प अमेरिकी 'स्पेशल फोर्सेज' के जरिए एक खुफिया ऑपरेशन को अंजाम देना है। इसका मुख्य उद्देश्य ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भारी-भरकम भंडार को अपने कब्जे में लेना और सुरक्षित करना है।
ट्रंप के इस नए प्लान की खबर सामने आते ही वैश्विक स्तर पर हड़कंप मच गया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका ने फिर से बमबारी या जमीनी हमला किया, तो यह पूरे मध्य पूर्व को एक भयानक तबाही की ओर धकेल देगा। ईरान पहले ही साफ कर चुका है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, और अगर अमेरिका कोई भी सैन्य कदम उठाता है, तो उसका अंजाम विनाशकारी होगा।
अब पूरी दुनिया की निगाहें सेंटकॉम् और ट्रंप के बीच होने वाली उच्च स्तरीय बैठक पर टिकी हुई हैं, जिसमें 'जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ' के चेयरमैन जनरल डैन कैन भी मौजूद रहेंगे। यह देखना बहुत अहम होगा कि क्या ट्रंप केवल नौसैनिक नाकाबंदी से काम चलाते हैं, या फिर वे इन तीन आक्रामक सैन्य विकल्पों में से किसी एक को हरी झंडी दिखा देते हैं।
इस मंडराते युद्ध के खतरे का सीधे तौर पर वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत जैसे विकासशील देशों पर असर पड़ेगा। ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाला व्यापार लगभग ठप है, जहां से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। अगर अमेरिका ने नया हमला किया, तो कच्चे तेल की सप्लाई पूरी तरह ठप हो जाएगी। इससे तेल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि होगी और भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम ऐतिहासिक स्तर को पार कर जाएंगे, जिससे आम आदमी पर महंगाई का भयानक बोझ पड़ेगा।
Updated on:
30 Apr 2026 04:23 pm
Published on:
30 Apr 2026 04:22 pm
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