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गधों पर भारी पड़ रही सौंदर्य और मर्दानगी की चाहत, चीन की दवा इंडस्ट्री में भारी डिमांड

Beauty And Masculinity on Donkeys: चीन में महिलाओं के सौंदर्य प्रसाधन और पुरुषों में मर्दानगी बढ़ाने वाली दवाएं गधों पर भारी पड़ रही हैं। पढ़िए देवेंद्र सिंह की खास रिपोर्ट...

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Beauty And Masculinity on Donkeys: चीन में महिलाओं के सौंदर्य प्रसाधन और पुरुषों में मर्दानगी बढ़ाने वाली दवाएं राजस्थान के गधों पर भारी पड़ रही हैं। इन दवाओं में गधों की खाल का इस्तेमाल होने से राजस्थान समेत देश के छह राज्यों के गधोंं की तस्करी चीन में हो रही है। इंग्लैंड की संस्था ब्रुक इंडिया की स्टडी रिपोर्ट में गधों की संख्या कम होने का यही प्रमुख कारण बताया गया है। इसका असर जयपुर के भावगढ़ बंध्या में शारदीय नवरात्र में चार दिवसीय खलकाणी माता के गधा मेले पर भी पड़ा है। करीब दो दशक पहले मेले में पूरे देश से 25000 से ज्यादा गधे बिकने आते थे। इस बार मेले केवल 15 गधे ही बिकने आए। मेले में लद्दाख, अफगानिस्तान, काठमांडू, सिंध, पंजाब, गुजरात तक से गधे आते थे। पहले तो आयोजक इसे गधों की उपयोगिता कम होना मान रहे थे, लेकिन रिपोर्ट में ने पशुपालन विभाग को सोचने पर मजबूर कर दिया है। 2019 की लाइव स्टॉक जनगणना के मुताबिक देश में सिर्फ 1.2 लाख गधे ही बचे थे, यह संख्या 2012 की जनगणना के मुकाबले 61.23 फीसदी कम दर्ज की गई।

खाल का अवैध तरीके से निर्यात

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रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में गधे की खाल का उपयोग बड़े पैमाने पर होता है। इसके चलते भारत समेत दूसरे देशों से अवैध तरीके से गधों को चीन मंगवाया जा रहा है। ब्रुक इंडिया ने की स्टडी में कहा गया है कि भारत के गधों को नेपाल के रास्ते चीन भेजा जा रहा है। ब्रुक इंडिया ने भारत सरकार के एनिमल हसबेंडरी व डेयरी डिपार्टमेंट को रिपोर्ट सौंप दी है।

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राजस्थान समेत इन छह राज्यों पर फोकस

आरटीआई एक्ट के तहत डीजीएफटी से 2016 से 2019 तक गधों और उसकी खाल निर्यात के संबंध में जानकारी मांगी। लेकिन कोई डाटा नहीं होने से जानकारी नहीं मिल सकी। इसके बाद ब्रुक इंडिया ने लुधियाना के शरत वर्मा से एक स्टडी करवाई। स्टडी में खुलासा हुआ कि देश में महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश व गुजरात के गधों को चीन भेजा जा रहा है।

लुप्त हो रहे गधों का हो संरक्षण

गधों के मेले में पहले दूर-दूर से गधे आया करते थे। गधों की संख्या कम होने का कारण मशीनीकरण माना जा रहा था लेकिन रिपोर्ट सामने आई तो सभी भौचक रह गए। सरकार को ऊंटों के संरक्षण की तरह गधा संरक्षण के लिए भी ठोस कदम उठाने चाहिए।
-उम्मेद सिंह राजावत, अध्यक्ष अखिल भारतीय गर्दभ मेला विकास समिति

कहां कितने कम हुए गधे (फीसदी में)

प्रदेश वर्ष 2012 वर्ष 2019
उत्तर प्रदेश 0.16 71.72
राजस्थान 0.23 71.31
गुजरात 0.11 70.94
बिहार 0.11 47.31
महाराष्ट्र 0.18 30.69