
Dharmendra Pradhan Gen Z Statement :Gen Z को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता: धर्मेंद्र प्रधान (फोटो सोर्स:@DharmendraPradhanOdisha)
Dharmendra Pradhan on Gen Z: जब किसी देश के 20 करोड़ युवा एक दिशा में कदम बढ़ा दें, तो हुकूमत का कोई भी पद उनके हौसले से बड़ा नहीं हो सकता। पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 'जेन जी' (Gen Z) के मिजाज को स्वीकार करते हुए एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक संदेश दिया है। उनका साफ कहना है कि 15 से 25 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की जिद और आकांक्षाओं के सामने मंत्री पद की प्रतिष्ठा कोई मायने नहीं रखती; देशहित सर्वोपरि है।
बदलते भारत में 'जेन जी' यानी नई पीढ़ी अब केवल मूक दर्शक नहीं, बल्कि देश की दशा और दिशा तय करने वाली सबसे बड़ी ताकत बन चुकी है। भुवनेश्वर में एक कार्यक्रम के दौरान संबलपुर से सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने नई उम्र के युवाओं की सोच और उनके प्रभाव पर बेहद आत्मीय और रोचक अंदाज में अपनी बात रखी।
हल्के-फुल्के लहजे में उन्होंने स्वीकार किया कि युवाओं की जिद के चलते कई बार उन्हें खुद भी प्रशासनिक चुनौतियों और विरोध का सामना करना पड़ा। लेकिन इस अनुभव ने उन्हें सिखाया कि इस पीढ़ी की ऊर्जा का विरोध करने के बजाय उन्हें समझना और उनके साथ संवाद साधना ही सबसे सही रास्ता है।
अपने अनुभवों को साझा करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने खुलासा किया कि उन्होंने खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष इस वास्तविकता को रखा था। उन्होंने कहा, "देश में 15 से 25 साल के लगभग 20 करोड़ युवा हैं। अगर 20 करोड़ नौजवान किसी बात पर अड़ जाएं या संकल्प ले लें, तो उनके दृढ़ निश्चय के आगे एक शिक्षा मंत्री का पद या उसकी जिम्मेदारियां नगण्य हो जाती हैं।" उन्होंने स्पष्ट किया कि पद उनके लिए कभी प्रतिष्ठा का सवाल नहीं रहा। यही कारण रहा कि केंद्र सरकार ने युवाओं की नब्ज को पहचानते हुए उनके साथ सीधा संवाद (जैसे 'परीक्षा पे चर्चा' और 'युवा संगम' जैसे मंचों के जरिए) स्थापित करने की रणनीति अपनाई।
धर्मेंद्र प्रधान ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए कहा कि देश में जब-जब बड़ा बदलाव या क्रांति आई है, उसका नेतृत्व युवाओं ने ही किया है। आजादी के आंदोलन से लेकर देश के नवनिर्माण तक, हर दौर में नौजवानों ने अपने सपनों और जीवन की आहुति दी है। उन्होंने कहा, "ऐतिहासिक रूप से युवा ही परिवर्तन के अगुआ रहे हैं। वे अपने दौर के 'जेन जी' थे।"
धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी रेखांकित किया कि कुछ राजनीतिक और असामाजिक तत्वों ने युवाओं को भ्रमित और गुमराह करने का प्रयास किया। परीक्षा सुधारों से लेकर भर्ती प्रक्रियाओं और नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के क्रियान्वयन के दौरान युवाओं के बीच असंतोष भड़काने की कोशिशें देखी गईं, लेकिन आज का युवा डिजिटल रूप से जागरूक है और अपने भविष्य को लेकर पूरी तरह स्पष्ट है।
दुनिया की सबसे युवा आबादी का नेतृत्व: भारत वर्तमान में विश्व का सबसे युवा देश है, जहां की 65% से अधिक आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। 15 से 25 वर्ष का आयु वर्ग न केवल आगामी चुनावों में गेम-चेंज वोटर समूह है, बल्कि डिजिटल इकोनॉमी का आधार स्तंभ भी है।
सवालों से नहीं डरती यह पीढ़ी: आज का युवा सोशल मीडिया और तकनीक के जरिए सीधे सत्ता से सवाल पूछने का माद्दा रखता है। चाहे पेपर लीक का मुद्दा हो, रोजगार की मांग हो या स्टार्टअप इकोसिस्टम युवाओं का दबाव सरकारों को अपनी नीतियां तेजी से बदलने पर विवश कर रहा है।
शिक्षा नीति में आमूलचूल बदलाव: नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और स्किल इंडिया मिशन के तहत अब रटने की विद्या के बजाय कौशल विकास, कोडिंग, इंटर्नशिप और क्रिटिकल थिंकिंग पर जोर दिया जा रहा है, ताकि 'जेन जी' की आधुनिक जरूरतों को पूरा किया जा सके।
Updated on:
09 Aug 2026 07:29 am
Published on:
09 Aug 2026 07:21 am
