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‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ में तुर्किये ने कर दिया पाकिस्तान और सऊदी के साथ खेल, क्या मिस्र भी होगा शामिल?

Islamic NATO: तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर बड़ा बयान दिया है। जानें क्यों उठ रहे हैं तुर्किये-सऊदी-पाकिस्तान समझौते पर सवाल, और क्या मिस्र भी होगा इसमें शामिल।
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defense agreement in Mecca.

मक्का में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए ने किया बड़ा रक्षा समझौता | (फोटो - @iYogeshMishra)

Mecca Defense Pact: पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के मक्का समझौते को लेकर दुनिया भर से टिप्पणियां आ रही है। अब तुर्किये के ताजा बयान से संयुक्त रक्षा समझौते पर सवाल उठने लगे हैं। तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा कि सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच रक्षा समझौता ईरान या किसी अन्य देश के खिलाफ नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि किसी एक पर हमला तीनों पर हमला नहीं है।

हमारे पास समझौते में कुछ भी ऐसा लिखित नहीं

हाकान फिदान ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि तीनों देश किसी भी विशिष्ट राज्य को तब तक दुश्मन नहीं मानते जब तक कि वे उनके खिलाफ शत्रुतापूर्ण कार्रवाई न करें। उन्होंने कहा कि हमारे पास समझौते में ऐसा कुछ लिखित रूप में नहीं है। उन्होंने कहा कि समझौते में शामिल किसी सदस्य देश को औपचारिक रूप से मदद के लिए अनुरोध करना होगा। अन्य सदस्य देशों की सहायता के लिए खुफिया जानकारी साझा करने से लेकर लॉजिस्टिक्स मदद या खतरे के आधार पर सैन्य टुकड़ियों की तैनाती तक की जानकारी देनी होगी। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि नए समझौते में जो भी प्रावधान हैं, वे समय आने पर सार्वजनिक किए जाएंगे।

मिस्र भी हो सकता है मक्का अकॉर्ड में शामिल

तुर्किये के विदेश मंत्री ने कहा कि मक्का अकॉर्ड में अन्य देशों ने भी शामिल होने की इच्छा जताई है। फिदान ने कहा कि मिस्त्र संभवत: अगले चरण में इस समझौते में शामिल हो सकता है। उन्होंने बताया कि तीनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्री, अपने सैन्य प्रमुखों के साथ, नियमित समिति बैठकें करेंगे। तीनों देश सऊदी अरब में एक सचिवालय भी स्थापित करेंगे।

गौरतलब है कि बीते शुक्रवार को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मक्का में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। तीनों देशों के गठजोड़ बनाने के बाद इसे इस्लामिक नाटो और सुन्नी नाटो कहा जाने लगा।

क्या सऊदी अरब और पाकिस्तान को तुर्किये ने दिया गच्चा ?

समझौते के बारे में स्पष्ट नहीं होने पर सामरिक मामलों के विशेषज्ञों ने कहा कि तुर्किये ने इस गठजोड़ में शामिल होकर फायदा भी उठाया है और सऊदी और पाकिस्तान को गच्चा भी दिया है। सामरिक मामलों के विशेषज्ञ कंवल सिब्बल ने कहा कि तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयब एर्दोगान हमेशा की तरह छल भरी कूटनीति करने में माहिर हैं। उन्होंने कहा कि अगर यह रक्षा समझौता किसी के खिलाफ नहीं है, तो फिर इसकी जरूरत ही क्यों पड़ी? क्या यह ऐसे खतरे से निपटने के लिए है, जिसका कोई अस्तित्व ही नहीं है।

बीबीसी से बात करते हुए मिडिल ईस्ट मामलों की एक्सपर्ट गोनुल तोल ने कहा कि 2025 के सऊदी अरब-पाकिस्तान रक्षा समझौते में भी सामूहिक रक्षा का प्रावधान था। लेकिन जब सऊदी अरब पर हमला हुआ, तब इससे पाकिस्तान की ओर से अपने-आप सैन्य कार्रवाई शुरू नहीं हुई। इस समझौते को ‘मुस्लिम नैटो’ कहना अभी भी बहुत महत्वाकांक्षी दावा होगा।

इजरायली PM नेतन्याहू के बेटे ने भी उठाया सवाल

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बेटे याइर नेतन्याहू ने भी इस समझौते को लेकर तल्ख सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि तो अगली बार जब ईरान, हूती या इराक में मौजूद मिलिशिया सऊदी अरब पर हमला करेंगे, तो क्या तुर्किये और पाकिस्तान ईरान, इराक और यमन पर हमला करेंगे? जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध होगा, तो क्या तुर्किये और सऊदी अरब भारत पर हमला करेंगे?