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‘जब जरूरत थी तो नहीं मिला साथ’, अब NATO पर भड़के Donald Trump, Greenland पर दोहराया दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने NATO पर नाराजगी जताते हुए Greenland का मुद्दा फिर उठाया। Iran युद्ध में सहयोग न मिलने से खफा ट्रंप ने गठबंधन की भूमिका पर सवाल उठाए, जबकि NATO प्रमुख Mark Rutte के साथ बैठक के बाद अटकलें तेज हो गई हैं।

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भारत

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Anurag Animesh

Apr 09, 2026

Donald Trump at NATO

Donald Trump at NATO(AI Image- ChatGpt)

NATO: अमेरिकी राष्ट्रपति लगातार बयान देते रहते हैं। ईरान युद्ध में सीजफायर के बाद अब ट्रंप फिर से भड़क गए हैं। इस बार उनका गुस्सा NATO(North Atlantic Treaty Organization) पर निकल रहा है। ट्रंप की नाराजगी कोई नई नहीं है, लेकिन इस बार उनका लहजा कुछ ज्यादा सख्त नजर आया। Mark Rutte जो नाटो के जनरल सेक्रेटरी हैं, के साथ बैठक के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि जब अमेरिका को जरूरत थी, तब NATO साथ नहीं था और भविष्य में भी शायद भरोसे लायक नहीं रहेगा। यही नहीं, उन्होंने अचानक Greenland का जिक्र छेड़ दिया। वही द्वीप जिसे लेकर वे पहले भी दावा जता चुके हैं। Greenland, जो कि Denmark के अधीन आता है, पहले भी ट्रंप के बयानों से विवादों में रहा है।

बैठक के पीछे क्या था असली मुद्दा?


इस बैठक को लेकर पहले से ही कयास लगाए जा रहे थे कि ट्रंप NATO से अमेरिका को बाहर निकालने जैसे बड़े फैसले पर बात कर सकते हैं। हालांकि बैठक के बाद ऐसा कोई साफ संकेत नहीं मिला। मीडिया से बात करते हुए जब रूटे से सवाल पूछा गया कि क्या अमेरिका NATO छोड़ सकता है, तो उन्होंने गोलमोल जवाब दिया। वहीं व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने कहा कि यह मुद्दा ट्रंप के दिमाग में है और चर्चा का हिस्सा भी रहा।

Iran युद्ध और NATO की दूरी


ट्रंप खास तौर पर इस बात से नाराज हैं कि उनके Iran के खिलाफ सैन्य अभियान में NATO देशों ने खुलकर साथ नहीं दिया। उनका आरोप है कि कई सहयोगी देश या तो पीछे हट गए या फिर सीमित समर्थन दिया। उन्होंने NATO को “पेपर टाइगर” तक कह दिया, यानी नाम बड़ा, काम छोटा। खासकर Strait of Hormuz को लेकर NATO की भूमिका पर भी उन्होंने सवाल उठाए। ट्रंप ने सिर्फ संगठन ही नहीं, बल्कि कुछ नेताओं पर भी व्यक्तिगत टिप्पणी की।

सैनिक हटाने की भी तैयारी?

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो ट्रंप NATO से बाहर निकलने की बजाय एक और रास्ता अपनाने पर विचार कर रहे हैं, उन देशों से अमेरिकी सैनिक हटाना, जिन्हें वे 'कम मददगार' मानते हैं। हालांकि NATO से पूरी तरह अलग होना आसान नहीं है। इसके लिए अमेरिकी संसद की मंजूरी जरूरी होगी।