
किसानों को महंगी खाद से राहत
Fertilizer Subsidy Hike: भारत में कृषि उत्पादन काफी हद तक उर्वरकों पर निर्भर है, जबकि देश में खाद के लिए कच्चे माल की कमी है। वेस्ट एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक बाजार में बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए खारिफ सीजन के लिए खाद सब्सिडी में 12% की बढ़ोतरी का फैसला लिया है। जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमतें बढ़ने के बावजूद अब किसानों को सस्ती खाद मिलेगी। इससे किसानों पर आर्थिक बोझ भी कम होगा, साथ ही कृषि उत्पादन को भी स्थिर बनाए रखने में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में खारिफ 2026 सीजन के लिए न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी (NBS) को मंजूरी दी गई। इस योजना के तहत कुल सब्सिडी बजट 41, 533 करोड़ रुपये तय किया गया है, जो पिछले साल के 37,216 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 11.60% अधिक है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह फैसला वैश्विक बाजार में बढ़ती कीमतों के असर से किसानों को बचाने के लिए लिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि देश में उर्वरकों की उपलब्धता पर कोई संकट नहीं है।
आयात निर्भरता और वैश्विक प्रभाव
सरकार ने खारिफ 2026 के लिए पोषक तत्वों की सब्सिडी दरें भी तय कर दी हैं। नाइट्रोजन पर 47.32 रुपये प्रति किलो, फॉस्फोरस पर 52.76 रुपये प्रति किलो, पोटाश पर 2.38 रुपये और सल्फर पर 3.16 रुपये प्रति किलो की दर तय की गई है। इनमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और सल्फर की दरों में वृद्धि हुई है। ये दरें अप्रैल से 30 सितंबर तक लागू रहेंगी। सरकार का कहना है कि इससे किसानों को सस्ती दरों पर खाद मिलेंगे और कृषि उत्पादन प्रभावित नहीं होगा। इस फैसले को ऐसे समय में लागू किया गया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और कच्चे माल की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है।
भारत खाद के लिए कच्चे माल के आयात पर निर्भर है। इसमें फॉस्फोरिक एसिड, रॉक फॉस्फेट, सल्फर, अमोनिया और म्यूरिएट ऑफ पोटाश जैसे तत्व शामिल हैं। इसके अलावा यूरिया उत्पादन के लिए प्राकृतिक गैस भी आयात की जाती है। साल 2024-25 में भारत ने बड़ी मात्रा में यूरिया, DAP, पोटाश और NPK खाद का आयात किया, जिसमें रूस, सऊदी अरब, मोरक्को और कनाडा प्रमुख सप्लायर रहे। वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष के कारण सप्लाई चेन और कीमतों पर दबाव बढ़ा है। भारत सरकार का यह कदम किसानों को आर्थिक दबाव से बचाने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
Updated on:
9 Apr 2026, 9:30 AM IST
Published on:
9 Apr 2026, 9:30 AM IST
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