
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी (ANI)
India Ethanol Program: सरकार ने एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की बिक्री का बचाव किया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने इस संबंध में कहा कि यदि कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने के दौरान पेट्रोल में एथेनॉल नहीं मिलाया गया होता, तो दिल्ली में पेट्रोल की कीमत करीब 125 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच सकती थी। मंत्रालय ने यह बयान एथेनॉल की लागत, खाद्य सुरक्षा पर इसके प्रभाव और कथित सरकारी सब्सिडी को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब में जारी किया।
मंत्रालय के अनुसार, 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया। इसके बावजूद उपभोक्ताओं को उस समय पेट्रोल के लिए केवल 94.77 रुपए प्रति लीटर ही चुकाने पड़े, क्योंकि प्रत्येक लीटर पेट्रोल में करीब 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया गया था। घरेलू स्तर पर तय कीमतों पर खरीदे गए एथेनॉल ने कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतों के प्रभाव को काफी हद तक कम किया। मंत्रालय का दावा है कि वैश्विक ऊर्जा संकट के दौरान इससे उपभोक्ताओं को करीब 30 रुपए प्रति लीटर की बचत हुई।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने उन आरोपों को भी सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि एथेनॉल उत्पादन के लिए खाद्यान्न का इस्तेमाल किया जा रहा है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि सब्सिडी वाले भारतीय खाद्य निगम (FCI) के चावल का उपयोग इस योजना में नहीं किया जा रहा है।
मंत्रालय ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद भी करीब 75 दिनों तक पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रहीं। इसके बाद मई में पेट्रोल की कीमत में 7.50 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई।
गौरतलब है कि सड़क परिवहन मंत्रालय ने गुरुवार को लोकसभा में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर एक बयान दिया था। इसमें कहा गया था कि E10 ईंधन के लिए डिजाइन किए गए BS-III, BS-IV और BS-VI वाहनों में E20 पेट्रोल का इस्तेमाल करने पर माइलेज में 2 से 6 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। यह कमी वाहन के प्रकार, इंजन की तकनीक और उसकी उम्र पर निर्भर करेगी।
Updated on:
01 Aug 2026 12:42 pm
Published on:
01 Aug 2026 12:19 pm
