
Chandrayaan-3: देश के सफलतम वैज्ञानिक मिशनों में से एक चंद्रयान-3 ने चंद्रमा की सतह पर भूकंपनीयता का अध्ययन कर यह साबित किया है कि वहां भी पृथ्वी की तरह झटके आते हैं। चंद्र सतह पर भूकंप के ये झटके उल्कापिंडों के प्रहार अथवा तापीय कारणों से हो सकते हैं। चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम के साथ भेजे गए पांच वैज्ञानिक उपकरणों (पे-लोड) में से एक इंस्ट्रूमेंट फॉर लूनर सिस्मिक एक्टिविटी (इलसा) ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय प्रदेशों में 250 से अधिक चंद्र भूकंपीय झटके दर्ज किए हैं। इनमें से लगभग 200 भूकंपीय संकेत, चंद्रयान-3 मिशन के साथ भेजे गए रोवर प्रज्ञान की पदचाप या अन्य उपकरणों के संचालन के दौरान दर्ज किए गए। लेकिन, शेष 50 संकेतों का संबंध रोवर या लैंडर विक्रम के किसी उपकरण के संचालन से नहीं हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इन 50 संकेतों का संबंध चंद्रमा की भूकंपीय गतिविधियों से हो सकता है। अमरीका के अपोलो मिशन के दशकों बाद यह पहला अवसर है जब, चंद्रमा की भूकंपनीयता का अध्ययन किया गया है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों ने कहा है कि संभवत: यह पहला अवसर है जब चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय प्रदेशों में भूकंपीय आंकड़े एकत्रित किए गए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि लैंडर विक्रम अत्याधुनिक उपकरण सिलिकॉन माइक्रो-मशीनिंग सेंसर तकनीक से लैस है और इसने अत्यंत सूक्ष्म चंद्र कंपन को भी दर्ज किया। इसरो वैज्ञानिकों की टीम ने चंद्रयान-3 उपकरण से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर विज्ञान पत्रिका इकारस में अपना शोधपत्र प्रकाशित किया है।
लैंडर के पे-लोड इलसा ने चंद्र भूकंपनीयता का सबसे लंबा दौर 14 मिनट का दर्ज किया है। लेकिन यह कम्पन रोवर की चहलकदमी की है। आंकड़ों से पता चलता है कि जब रोवर प्रज्ञान, लैंडर विक्रम के करीब से गुजर रहा था तो भूकंपीय संकेत तीव्र थे। लगभग 26 किग्रा वजनी रोवर 1 सेमी प्रति सेकेंड की गति से चंद्रमा की सतह पर चल रहा था। लैंडर से 7 मीटर दूरी तक झटकों की तीव्रता उच्च रही। लेकिन जब दूरी 12 मीटर हो गई तो भूकंपीय संकेतों की तीव्रता क्षीण होने लगी। वैज्ञानिकों का दावा है कि भविष्य में चंद्रमा पर बस्तियां बसाई जाती हैं तो इस तरह के अध्ययन काफी महत्वपूर्ण साबित होंगे।
Updated on:
10 Sep 2024, 7:48 AM IST
Published on:
10 Sep 2024, 7:32 AM IST
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