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हर दिन 7 लाख होगी सुनवाई, ECI ने पश्चिम बंगाल में 7 फरवरी तक SIR पूरा करने का रखा टारगेट

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में 7 फरवरी तक SIR का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा है। 6,500 सुनवाई केंद्रों के जरिए हर दिन 7,00,000 सुनवाई की जाएगी।

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SIR (प्रतीकात्मक तस्वीर)

SIR: पश्चिम बंगाल में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर दावों और आपत्तियों पर सुनवाई पूरी हो गई है। फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने में अब 1 महीने से कम समय बचा है। ऐसे में चुनाव आयोग ने पूरे राज्य में फैले 6,500 सुनवाई केंद्रों के ज़रिए हर दिन 7,00,000 सुनवाई पूरी करने का लक्ष्य रखा है।

प्रत्येक अधिकारी सुनेंगे 107 मामले

पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी के ऑफिस से मिली जानकारी के अनुसार, आयोग का मानना है कि यह काम तय समय पर पूरा कर लिया जाएगा। प्रत्येक सुनवाई केंद्र में चुनावी अधिकारियों को मोटे तौर पर हर दिन लगभग 107 सुनवाई के मामले संभालने होंगे। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर दावों और आपत्तियों पर सुनवाई की डेडलाइन 7 फरवरी है, जिसके बाद 14 फरवरी को फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश की जाएगी।

अप्रैल में हो सकता है चुनाव

फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने के बाद चुनाव आयोग विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर सकता है। कुछ दिनों पहले ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए कहा था कि मतदान और मतगणना अप्रैल के आखिर तक पूरी हो जाएगी।

अनमैप्ड वोटरों की सुनवाई प्रक्रिया लगभग पूरी

आयोग के अनुसार अनमैप्ड वोटरों की सुनवाई की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। अगले कुछ दिनों में लॉजिकल विसंगति वाले मामलों की सुनवाई पूरी कर ली जाएगी। अनमैप्ड वोटर वे हैं जो 2002 की वोटर लिस्ट के साथ "सेल्फ-मैपिंग" या "प्रोजेनी-मैपिंग" के ज़रिए कोई लिंक स्थापित नहीं कर पाए थे। दूसरी ओर, "लॉजिकल विसंगति" वाले मामले उन वोटरों से संबंधित हैं जिनके मामलों में "प्रोजेनी मैपिंग" के दौरान अजीब फैमिली-ट्री डेटा पाया गया था।

दो चरणों में होगा वेरिफिकेशन और ऑथेंटिकेशन

आयोग ने पहले ही निर्देश दिया था कि सुनवाई के लिए बुलाए गए वोटरों द्वारा दिए सहायक पहचान दस्तावेजों का दो चरणों में वेरिफिकेशन और ऑथेंटिकेशन किया जाएगा। इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अधिकारी (ERO) वेरिफिकेशन और ऑथेंटिकेशन का पहला चरण करेंगे, और जिला मजिस्ट्रेट, जो जिला चुनाव अधिकारी भी हैं, वेरिफिकेशन का दूसरा चरण करेंगे। कमीशन ने पहले ही यह साफ कर दिया था कि राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए डोमिसाइल सर्टिफिकेट और वेस्ट बंगाल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन द्वारा आयोजित माध्यमिक परीक्षा के एडमिट कार्ड को असली पहचान पत्र नहीं माना जाएगा।