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Election Strategies : किसके सिर होगा ताज, अब यहां कौन करेगा राज? पढ़िए राज्यवार रिपोर्ट

Elections: चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों के मददेनजर जानिए मुददों पर आधारित हार व जीत के समीकरण।

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भारत

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MI Zahir

Mar 15, 2026

Election Commission

चुनाव आयोग। (फोटो- आईएएनएस)

Election Strategies: भारत के चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) की तारीखों का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। यह राजनीतिक घमासान (Political Battle) मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल (West Bengal), तमिलनाडु (Tamil Nadu), असम (Assam), केरल (Kerala) और पुडुचेरी (Puducherry) में देखने को मिलेगा। इस बहुप्रतीक्षित घोषणा (Announcement) के साथ ही सभी राजनीतिक दलों (Political Parties) ने अपनी-अपनी कमर कस ली है। चुनाव प्रक्रिया (Election Process) 9 अप्रेल से शुरू होगी और अंतिम चरण के मतदान के बाद सभी राज्यों के नतीजों (Results) की एक साथ 4 मई को घोषणा की जाएगी। अब जनता के हाथ में यह फैसला है कि वह तय करे कि किसके सिर सजेगा सत्ता का ताज और अगले पांच साल तक कौन करेगा राज। हमारी यह विशेष रिपोर्ट (Ground Report) आपको इन सभी राज्यों के मौजूदा राजनीतिक समीकरणों (Political Equations), विभिन्न दलों की चुनावी रणनीतियों (Election Strategies) और वहां के मुख्य चुनावी मुद्दों (Key Election Issues) के बारे में विस्तार से बताएगी। इस लोकतांत्रिक पर्व (Democratic Festival) पर पूरे देश की नज़रें टिकी हुई हैं।

पश्चिम बंगाल में दो चरणों का घमासान (West Bengal Elections)

पश्चिम बंगाल में इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प और कांटे का होने वाला है। पिछले विधानसभा चुनावों (8 चरण) के विपरीत, चुनाव आयोग ने इस बार राज्य में सिर्फ दो चरणों (23 अप्रेलऔर 29 अप्रेल) में मतदान कराने का फैसला किया है। सत्ताधारी पार्टी अपनी कल्याणकारी योजनाओं और क्षेत्रीय अस्मिता के दम पर सत्ता बचाने की पुरजोर कोशिश कर रही है। वहीं, मुख्य विपक्षी दल घुसपैठ, कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर बेहद आक्रामक है। राज्य में केंद्रीय बलों की भारी तैनाती के बीच चुनाव शांतिपूर्ण संपन्न कराना एक बड़ी चुनौती है।

असम में विकास और पहचान का मुद्दा (Assam Assembly)

असम में 9 अप्रेल को एक ही चरण में मतदान की प्रक्रिया पूरी होगी। मौजूदा सरकार यहाँ बुनियादी ढांचे के विकास, बाढ़ प्रबंधन और नागरिकता से जुड़े कड़े फैसलों के सहारे दोबारा सत्ता में वापसी की उम्मीद कर रही है। मुख्यमंत्री का आक्रामक प्रचार सत्ताधारी दल का सबसे बड़ा हथियार बना हुआ है। दूसरी तरफ, विपक्ष बेरोजगारी, महंगाई और स्थानीय अधिकारों के मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति अपना रहा है।

केरल में ऐतिहासिक बदलाव की उम्मीद (Kerala Politics)

केरल की 140 विधानसभा सीटों के लिए 9 अप्रेल को वोट डाले जाएंगे। यहां सत्ताधारी वामपंथी गठबंधन अपनी सरकार बचाने के लिए मैदान में डटा है, जबकि मुख्य विपक्षी गठबंधन सत्ता-विरोधी लहर का फायदा उठाकर वापसी की फिराक में है। केरल का ऐतिहासिक ट्रेंड रहा है कि यहां की जनता हर चुनाव में सरकार बदल देती है। ऐसे में यह देखना बेहद रोमांचक होगा कि क्या मौजूदा सरकार लगातार तीसरी बार जीतकर नया इतिहास रचेगी, या विपक्ष सत्ता में वापसी करेगा।

तमिलनाडु में मुफ्त वादों की टक्कर (Tamil Nadu Polls)

दक्षिण के अहम राज्य तमिलनाडु में एक ही चरण में 23 अप्रेल को वोट डाले जाएंगे। यहां मुख्य रूप से सत्ताधारी गठबंधन और विपक्षी दल के बीच सीधी टक्कर है। दोनों ही प्रमुख दल जनता को लुभाने के लिए बड़े-बड़े वादे और वित्तीय सहायता (फ्रीबीज़) की घोषणाएं कर रहे हैं। राज्य सरकार अपने औद्योगिक विकास और सामाजिक न्याय के एजेंडे पर वोट मांग रही है। साथ ही, राष्ट्रीय दल भी इस राज्य में अपने पैर जमाने और वोट प्रतिशत बढ़ाने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं।

पुडुचेरी में केंद्र शासित प्रदेश की जंग (Puducherry Fight)

पुडुचेरी की 30 सीटों वाली विधानसभा के लिए 9 अप्रेल को मतदान होगा। वर्तमान में यहां जो गठबंधन सत्ता में है, वह अपने विकास कार्यों और केंद्र के सहयोग के नाम पर जनता के बीच जा रहा है। स्थानीय मुद्दों, शराब नीति और रोजगार के दावों के बीच, विपक्षी दल सत्ताधारी गठबंधन को कड़ी चुनौती दे रहे हैं। 4 मई को आने वाले नतीजे ही तय करेंगे कि इन पांचों राज्यों की कमान किसके हाथों में जाएगी।