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5 राज्यों में होने हैं चुनाव, इलेक्शन से पहले निर्वाचन आयोग का बड़ा ऐलान, इस बात की सख्त चेतावनी

ECI Exit Poll Ban: असेंबली इलेक्शन से पहले भारत निर्वाचन आयोग ने बड़ा ऐलान किया है। ताजा अपडेट जानने के लिए नीचे पढ़ें पूरी खबर…

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भारत

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Saurabh Mall

Mar 24, 2026

ECI UPDATE

इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया का बड़ा ऐलान (सोर्स: ANI और AI जनरेटेड इमेज)

Election Commission of India Latest Update: पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। आयोग ने साफ कर दिया है कि चुनाव के दौरान खास फेज में किसी भी तरह के ओपिनियन पोल या एग्जिट पोल दिखाने, छापने या शेयर करने पर पूरी तरह रोक रहेगी।

ECI के मुताबिक, असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को वोटिंग होगी, जबकि तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान होगा। वहीं पश्चिम बंगाल में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। सभी राज्यों में वोटों की गिनती 4 मई को होगी।

आयोग ने यह भी बताया कि एग्जिट और ओपिनियन पोल पर यह बैन 9 अप्रैल सुबह 7 बजे से लागू होगा और 29 अप्रैल शाम 6:30 बजे तक जारी रहेगा। यानी पूरे मतदान प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह के पोल रिजल्ट सार्वजनिक नहीं किए जा सकेंगे।

चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के लिए आयोग ने उठाया कदम

ECI का कहना है कि यह कदम चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के लिए उठाया गया है, ताकि मतदाता बिना किसी प्रभाव के अपने वोट का इस्तेमाल कर सकें।

रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट (Representation of the People Act) 1951 के तहत जारी इस आदेश में कहा गया है कि तय समय के दौरान एग्जिट पोल के नतीजों को टीवी, अखबार, ऑनलाइन या किसी भी माध्यम से दिखाना या छापना मना है। इसका मकसद यह है कि वोटिंग के दौरान लोगों पर किसी तरह का असर न पड़े और चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से हो सके।

यही कारण है कि चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर अर्चना पटनायक ने कहा कि एग्जिट पोल के साथ-साथ चुनाव के आखिरी समय में ओपिनियन पोल और उससे जुड़े कंटेंट पर भी सख्त रोक रहेगी।

कानून के अनुसार, वोटिंग खत्म होने से 48 घंटे पहले टीवी या अन्य इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर चुनाव से जुड़ी कोई भी चीज जैसे सर्वे या ओपिनियन पोल दिखाना मना होता है।

इस समय को साइलेंस पीरियड कहा जाता है, ताकि वोटर्स बिना किसी दबाव या असर के अपना फैसला ले सकें।
चुनाव आयोग पहले भी हर चुनाव में इन नियमों को लागू करता रहा है ताकि चुनाव निष्पक्ष बने रहें।

नियम का उल्लंघन करने पर होगी कार्रवाई

अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर कोई इन नियमों को तोड़ता है, तो उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होगी। मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और राजनीतिक दलों से कहा गया है कि वे इन नियमों का सख्ती से पालन करें। इन पाबंदियों का मकसद यह है कि सभी पार्टियों को बराबर मौका मिले और चुनाव प्रक्रिया सुरक्षित और निष्पक्ष बनी रहे।