
Elgar Parishad case : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा को एल्गार परिषद मामले में बंबई उच्च न्यायालय के आदेश पर लगी रोक हटाकर जमानत पर बाहर आने की अनुमति दे दी। 73 वर्षीय गौतम नवलखा को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उनकी बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए नवंबर 2022 से घर में नजरबंद कर दिया गया था। न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एस वी एन भट्टी की पीठ ने नवलखा को घर में नजरबंदी के दौरान सुरक्षा पर हुए खर्च के लिए 20 लाख रुपये का भुगतान करने का भी निर्देश दिया।
पीठ ने कहा, हम रोक को आगे नहीं बढ़ाने के पक्ष में हैं क्योंकि उच्च न्यायालय का आदेश जमानत देने में विस्तृत है। मुकदमा पूरा होने में कई साल लगेंगे। विवादों पर विस्तार से चर्चा किए बिना, हम रोक की अवधि नहीं बढ़ाएंगे। कुल मिलाकर विपक्षी पार्टी को 20 लाख रुपये का भुगतान यथाशीघ्र किया जाए।
कोर्ट ने कहा कि नवलखा चार साल से अधिक समय से जेल में हैं और मामले में अभी तक आरोप तय नहीं किए गए। बॉम्बे हाई कोर्ट ने 19 दिसंबर, 2022 को नवलखा को जमानत दे दी थी, लेकिन राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने के लिए समय मांगने के बाद अपने आदेश पर तीन सप्ताह के लिए रोक लगा दी थी।
नवंबर 2022 में, सुप्रीम कोर्ट ने नवलखा को घर में नजरबंद करने की अनुमति दी और वह वर्तमान में नवी मुंबई में रह रहे हैं। यह मामला 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों से संबंधित है, जिसके बारे में पुलिस का दावा है कि अगले दिन शहर के बाहरी इलाके में कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा भड़क उठी। दंगों में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। मामले में सोलह कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से पांच फिलहाल जमानत पर हैं।
Updated on:
14 May 2024 04:28 pm
Published on:
14 May 2024 02:51 pm
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