
जेफ्री एपस्टीन केस
Epstein Files: अमेरिकी सेक्स तस्कर जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी हालिया अनसील्ड डॉक्यूमेंट्स ने भारत में राजनीतिक हलचल मचा दी है। इन फाइल्स में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम कई बार उल्लेखित है, जिसे लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कार्रवाई की मांग की है। सोशल मीडिया पर वायरल दावों में कहा जा रहा है कि एपस्टीन ने 2014 से 2017 के बीच पुरी से कई मुलाकातें कीं और यहां तक कि सेक्स स्कैंडल से जोड़ा जा रहा है। लेकिन क्या वाकई कोई गहरा कनेक्शन है या यह सिर्फ एपस्टीन की नाम-ड्रॉपिंग की आदत है?
जेफ्री एपस्टीन एक अमेरिकी अरबपति था, जो नाबालिग लड़कियों की तस्करी और यौन शोषण के आरोप में जेल गया। 2008 में उसकी सजा हुई, लेकिन वह अमीरों और नेताओं के साथ नेटवर्किंग करता रहा। 2019 में जेल में उसकी संदिग्ध आत्महत्या हुई। अब यूएस हाउस ओवरसाइट कमिटी द्वारा रिलीज डॉक्यूमेंट्स में उसके कैलेंडर और ईमेल्स शामिल हैं। इनमें पीएम मोदी का नाम भी अप्रत्यक्ष रूप से आया है, जहां एपस्टीन ने 2019 में स्टीव बैनन को मोदी से मिलवाने का दावा किया था।
फाइल्स के अनुसार, 2014 से 2017 के बीच एपस्टीन के कैलेंडर में पुरी के साथ कम से कम पांच अपॉइंटमेंट्स दर्ज हैं। उस समय पुरी संयुक्त राष्ट्र में भारत के पूर्व स्थायी प्रतिनिधि थे और इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) के वाइस प्रेसिडेंट थे। IPI के प्रमुख टेरजे रॉड-लार्सेन एपस्टीन के करीबी थे, जो इजरायल से जुड़े मुद्दों पर काम करते थे। मुलाकातें न्यूयॉर्क में यूएन इवेंट्स और ग्लोबल अफेयर्स से जुड़ी बताई जा रही हैं। एक 2014 ईमेल में एपस्टीन ने पुरी को (गलत स्पेलिंग 'Hardeep Puree' से) यूएन जनरल असेंबली और क्लाइमेट समिट के दौरान आमंत्रित करने का जिक्र किया।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और पूर्व सीएम पृथ्वीराज चव्हाण ने इसे गंभीर बताया। चव्हाण ने कहा, "एक दोषी सेक्स ऑफेंडर से भारत के शीर्ष नेतृत्व का कोई भी संबंध चिंताजनक है। सरकार को स्पष्टीकरण देना चाहिए।" सोशल मीडिया पर दावे वायरल हैं कि पुरी एपस्टीन के 'क्लाइंट' थे और मोदी कार्रवाई करेंगे।
भाजपा ने इसे खारिज किया है। प्रवक्ता अमित मालवीय ने कहा कि ईमेल में 'गर्ल्स' का जिक्र असंबंधित है और पुरी का नाम सिर्फ रैंडम लिस्ट में है। कोई सबूत नहीं कि पुरी एपस्टीन के अपराधों से जुड़े थे। कई रिपोर्ट्स (ड्रॉप साइट न्यूज, द हिंदू) स्पष्ट करती हैं कि एपस्टीन नाम-ड्रॉपिंग कर अपनी पहुंच दिखाता था। ट्रंप, बिल क्लिंटन जैसे कई बड़े नाम भी ऐसे ही उल्लेखित हैं, बिना अपराध के।
भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने भी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया है। स्वामी ने लिखा, अब मर चुके जेफरी एपस्टीन को नेताओं के लिए दलाल के तौर पर जाना जाता था। हैरानी की बात है कि 2014 से उनकी हमारे केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी के साथ कई मुलाकातें हुई थीं। एपस्टीन को अमेरिका में जेल में डाला गया था और जेल में डाले जाने के कुछ दिनों बाद 2019 में आत्महत्या कर ली। क्या मंत्री पुरी बताएंगे कि उनका एपस्टीन से क्या संबंध था?
स्वतंत्र रिपोर्ट्स और फैक्ट-चेक में कोई सबूत नहीं मिला कि पुरी या मोदी एपस्टीन के सेक्स स्कैंडल से जुड़े। मुलाकातें प्रोफेशनल और जियोपॉलिटिकल (भारत-इजरायल संबंध) संदर्भ में थीं। अनिल अंबानी के ईमेल्स भी इसी तरह के हैं। क्या मोदी एक्शन लेंगे? फिलहाल सरकार चुप है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना ठोस सबूत के कोई कार्रवाई मुश्किल। यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह सकता है।
Updated on:
07 Jan 2026 04:55 pm
Published on:
07 Jan 2026 04:54 pm
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