scriptFarm Laws Withdrawn 12 lakh crores dented in economy by kisan andolan | Farm Laws Withdrawn: किसान आंदोलन से अर्थव्यवस्था को करीब 12 लाख करोड़ रुपए का नुकसान, अब इस रकम की भरपाई करना बड़ी चुनौती | Patrika News

Farm Laws Withdrawn: किसान आंदोलन से अर्थव्यवस्था को करीब 12 लाख करोड़ रुपए का नुकसान, अब इस रकम की भरपाई करना बड़ी चुनौती

करीब एक साल तक चले इस आंदोलन में जहां लगभग 700 किसानों की जान गई, वहीं अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में लगभग 12 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। बड़ा सवाल यह है कि इन मौतों और आर्थिक मोर्चे पर हुए इस नुकसान की भरपाई कब तक और कैसे होगी।

नई दिल्ली

Updated: November 19, 2021 09:13:43 pm

नई दिल्ली।

मोदी सरकार ने लगभग 14 महीने बाद यू-टर्न लेते हुए तीन नए कृष‍ि कानूनों को वापस ले लिया है। इन तीनों कानून के विरोध में देशभर के किसान करीब एक साल से आंदोलन कर रहे थे।
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इस आंदोलन में लगभग 700 किसानों की जान गई। वहीं, आर्थिक मोर्चे पर भी बड़ा नुकसान हुआ है। अनुमान लगाया जा रहा है कि उद्योगों को इस आंदोलन से लगभग 12 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। हालांकि, यह रकम इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि यह अनुमान उत्तर भारत के लगभग आधा दर्जन राज्यों का ही है। देशभर का आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा होगा।
दरअसल, एक साल तक चले किसान आंदोलन से कई बार धरना, चक्का जाम, रेल रोको जैसे विरोध प्रदर्शन किए गए। इनसे माल की आवाजाही में अड़चनें आईं और अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान हुआ। कुछ महीने पहले इंडस्ट्री चैम्बर एसोचैम (ASSOCHAM) ने आंदोलन की वजह से हो रहे रोज के नुकसान का अनुमानित आंकड़ा जारी किया था।
इसके तहत, कृष‍ि कानून के विरोध में चल रहे आंदोलन से खासकर पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों को रोज करीब 3,500 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। एसोचैम का कहना था कि ये सभी राज्य एक-दूसरे से जुड़े क्षेत्र में हैं और इनको सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है।
इसकी वजह यह है कि इन राज्यों की अर्थव्यवस्था प्रमुख रूप से खेती, फूड प्रोसेसिंग, कपास, फार्म मशीनरी, टूरिज्म, हॉस्पिटलिटी, ट्रांसपोर्ट जैसे सेक्टर पर आधारित है। इस तरह यह माना जा सकता है कि एक साल में किसान आंदोलन से देश की अर्थव्यवस्था को खरबों रुपये का नुकसान हुआ है।
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बता दें कि देश में 17 सितंबर 2020 को संसद में खेती से जुड़े तीन कानून पास किए गए थे। इन कानूनों के विरोध में देश के कई राज्यों के किसानों ने पिछले साल नवंबर में अपना प्रदर्शन शुरू किया था। पिछले साल संसद के मॉनसून सत्र में इन तीनों कानूनों को लोकसभा में पारित किया गया था, लेकिन किसानों का मानना था कि ये काले कानून हैं जो सरकार को वापस लेने चाहिए।
इसके लिए पंजाब, हरियाणा और हिमाचल राज्यों में किसानों के बीच 3 नवंबर से हलचल शुरू हुई थी और इसके बाद कृषि मंडियों, जिला मजिस्ट्रेट के दफ्तरों और सड़कों पर कुछ छोटे विरोध प्रदर्शन किए गए। वहीं, इसके बाद किसानों ने अपने आंदोलन को बड़ा करते हुए 25 नवंबर को दिल्ली कूच करने का ऐलान किया।
पहला कानून
कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक 2020 है। इसके मुताबिक किसान मनचाही जगह पर अपनी फसल बेच सकते हैं। बिना किसी रुकावट के दूसरे राज्यों में भी फसल बेच और खरीद सकते हैं।
दूसरा कानून
मूल्य आश्वासन एवं कृषि सेवाओं पर कृषक सशक्तिकरण एवं संरक्षण अनुबंध विधेयक 2020 है। इसके जरिए देशभर में कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को लेकर व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव है। फसल खराब होने पर उसके नुकसान की भरपाई किसानों को नहीं बल्कि, एग्रीमेंट करने वाले पक्ष या कंपनियों को करनी होगी।
तीसरा कानून
आवश्यक वस्तु संशोधन बिल- 1955 में बने आवश्‍यक वस्‍तु अधिनियम से अब खाद्य तेल, तिलहन, दाल, प्याज और आलू जैसे कृषि उत्‍पादों पर से स्टॉक लिमिट हटा दी गई है।

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