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मौत से 5 महीने पहले BJP के MLA ने लिखी थी PM मोदी को चिट्ठी, CM ऑफिस से निकलते ही हुआ था जानलेवा हमला

बीजेपी विधायक वंगजागिन वाल्टे ने मौत से पांच महीने पहले पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी थी। इसमें उन्होंने कहा कि सीबीआई और एनआईए ने कोई स्पेशल जांच नहीं की। पढ़ें पूरी खबर...

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मरने से पहले बीजेपी विधायक ने लिखी चिट्ठी (फोटोःIANS)

मणिपुर के भाजपा विधायक वंगजागिन वाल्टे (62) का 20 फरवरी 2026 को गुरग्राम के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह साल 2023 में कुकी-मैतेई जातीय हिंसा के दौरान भीड़ का शिकार हो गए थे। गंभीर रूप से घायल होने के चलते वह लकवाग्रस्त एवं विकलांग भी हो गए थे। इससे वह उबर नहीं पाए। वाल्टे फेरजावल जिले के थानलोन विधानसभा क्षेत्र से तीन बार के विधायक रह चुके थे। वह पूर्व सीएम एन बिरेन सिंह के सलाहकार भी थे। उन्होंने मरने से 5 महीने पहले जातीय हिंसा व अपने ऊपर हुए हमले को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी को चिट्ठी भी लिखी थी।

उन्होंने पीएम मोदी से कहा था कि कैसे 4 मई 2023 को मुख्यमंत्री कार्यालय में सुरक्षा बैठक के बाद इंफाल में आरआईएमएस रोड पर वापस जाते समय 'मेईतेई मिलिशिया संगठन अरंबाई टेंगगोल ने निशाना बनाया था। उन्होंने पत्र में लिखा कि हमले में उन्हें इतनी गंभीर चोटें आईं कि वे लकवाग्रस्त हो गए और जीवन भर के लिए अपंग रह गए।

लौटते समय हुआ बीजेपी विधायक पर हमला

वाल्टे ने कहा कि एक तीन बार के विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री के सलाहकार के रूप में, मैंने ज़ोमी-कुकी-हमार समुदाय की चुनौतियों को करीब से देखा है। 4 मई 2023 को सीएम कार्यालय में मैं अपने लोगों विशेषकर चुराचांदपुरवासियों की इंफाल में फंसे होने के कारण सुरक्षित निकासी पर चर्चा कर रहा था। यहां से घर लौटते समय आरआईएमएस रोड पर मेईतेई मिलिशिया के लोगों ने मुझ पर जानलेवा हमला किया। इससे मैं आज तक लकवाग्रस्त एवं अपंग हूं। इस घटना की गंभीरता के बावजूद, सीबीआई या एनआईए जैसी कोई विशेष जांच शुरू नहीं की।

केंद्र शासित प्रदेश बनाने की मांग

वाल्टे ने आगे कहा कि इंफाल और घाटी क्षेत्र से जोमी-कुकी-हमार समुदाय को पूरी तरह खदेड़ दिया गया है, जिससे राज्य में पूर्ण भौतिक और सामाजिक विभाजन हो गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि इस स्वदेशी जनजातीय समुदाय को अलग प्रशासन दिया जाए। साथ ही, उस इलाके को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया जाए।

पीएम मोदी को लिखे पत्र में उन्होंने बताया कि उनकी यह अपील कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन और यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट की मांगों से मेल खाता है, जो सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस वार्ता के माध्यम से राजनीतिक समाधान चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि इस अनुरोध पर उच्चतम स्तर पर विचार किया जाए, क्योंकि मणिपुर के इतिहास में जबरन थोपी गई शांति सतत साबित नहीं हुई है।

वाल्टे के ड्राइवर का भी हो चुका निधन

दरअसल 4 मई 2023 को हमले के दिन बीजेपी विधायक वाल्टे अपनी आधिकारिक आवास लैंफेलपट की ओर जा रहे थे। इस दौरान उनकी कार को रोका गया और उन तथा उनके ड्राइवर थंगहौलाल पर हमला किया गया। ड्राइवर की मौत हमले के कुछ ही दिनों बाद हो गई थी, लेकिन हमलावरों की अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। इस मामले पर मणिपुर के उपमुख्यमंत्री लोसई दिक्हो ने मीडिया को बताया कि गिरफ्तारी में समय लग सकता है क्योंकि यह भीड़ द्वारा हमला था। हम सभी लीड्स का पीछा कर रहे हैं।

वाल्टे की निधन पर 3 दिन का राजकीय शोक

वाल्टे का निधन मणिपुर में जातीय हिंसा के एक प्रमुख पीड़ित के रूप में देखा जा रहा है। मणिपुर सरकार ने उनके सम्मान में 22 फरवरी से तीन दिवसीय राजकीय शोक घोषित किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है और उनके सार्वजनिक सेवा को याद किया है।यह घटना मणिपुर में जारी मेईतेई-कुकी-ज़ो संघर्ष की जटिलता को दर्शाती है, जहां अरंबाई टेंगगोल जैसे नए कट्टरपंथी मेईतेई सशस्त्र समूह सक्रिय हो गए हैं।