
वीएस अच्युतानंद के परिवार ने पद्म विभूषण से किया मना (फोटो-IANS)
केरल के पूर्व सीएम व दिग्गज कम्युनिस्ट नेता वीएस अच्युतानंद को भारत सरकार ने मरणोपरांत पद्म विभूषण से नवाजा, लेकिन पूर्व सीएम के परिवार ने कहा कि हम इस अवार्ड को स्वीकार नहीं करेंगे। अच्युतानंद के बेटे वीए अरुणकुमार ने कहा कि हमें केंद्रीय गृह मंत्रालय से बताया गया है कि मेरे दिवंगत पिता, वी.एस. अच्युतानंदन, को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक, पद्म विभूषण, देने का फैसला किया गया है। मैं इस संबंध में आज मिला लेटर नीचे शेयर कर रहा हूं।
अरुण कुमार ने कहा कि अच्युतानंद के प्रति लोगों ने जो प्यार और सम्मान लगातार दिखाया है। जिन्होंने दशकों तक जन संघर्षों और अडिग राजनीतिक रुख के साथ केरल के सार्वजनिक जीवन में साथ दिया। वह हमेशा हमारे लिए ताकत का एक बड़ा स्रोत रहा है। हम इस सम्मान को उनके सार्वजनिक जीवन की पहचान के रूप में देखते हैं।
अरुण ने कहा कि जिस आंदोलन का उन्होंने प्रतिनिधित्व किया। उसका ऐसे सरकारी सम्मानों को स्वीकार करने पर एक स्पष्ट राजनीतिक रुख था। उन्होंने कहा कि एक कम्युनिस्ट के तौर पर अच्युतानंद ने हमेशा पार्टी के फैसलों का सम्मान किया और वामपंथी मूल्यों का पालन किया।
पूर्व सीएम के बेटे ने कहा कि इस मामले पर हमारा फैसला मेरे पिता अच्युतानंद के आदर्शों और पार्टी के रुख के अनुरूप होगा। हमारा मानना है कि लोगों के दिलों में वी.एस. की जगह किसी भी अवॉर्ड से बड़ी है। हम लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं कि वे उन पर अपना स्नेह और सम्मान बरसाते रहते हैं। अरुण कुमार ने कहा कि नरसिम्हा राव की सरकार ने जब कम्युनिस्ट नेता ई.एम.एस. नंबूदरीपाद को पद्म विभूषण से नवाजने की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने यह सम्मान लेने से मना कर दिया। इस मामले पर पार्टी के महासचिव एम ए बेबी ने कहा, "अगर अच्युतानंदन जिंदा होते, तो वह यह अवॉर्ड स्वीकार नहीं करते।
वहीं, साल 1996 में यूनाइटेड फ्रंट की सरकार ने पश्चिम बंगाल के तत्कालीन सीएम ज्योति बसु को भारत रत्न देने पर विचार किया, तो उस दौरान सीपीआई (एम) और बसु ने सम्मान स्वीकार करने से मना दिया। इसके बाद यूनाइटेड फ्रंट की सरकार ने प्रस्ताव वापस ले लिया गया।
वहीं, CPM महासचिव हरकिशन सिंह सुरजीत, पश्चिम बंगाल के पूर्व सीएम बुद्धदेव भट्टाचार्य के मामले में भी पार्टी और परिवार ने यही रुख अपनाया था। दरअसल, वामदलों का यह कहना है कि उनके नेता सामाजिक बदलाव के लिए काम करते हैं न कि अवार्ड पाने के लिए। सरकारी सम्मान सत्ताधारी व्यवस्था से मान्यता का प्रतिनिधित्व करते हैं।
Updated on:
06 Feb 2026 10:19 am
Published on:
06 Feb 2026 09:47 am
बड़ी खबरें
View Allबिहार चुनाव
राष्ट्रीय
ट्रेंडिंग
