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पीएम मोदी और शाह से जुड़ा था इशरत जहां एनकाउंटर केस, खुलासा करने वाले अधिकारी को मिला पद्म श्री

गृह मंत्रालय के पूर्व अधिकारी आरवीएस मणि को पद्म श्री अवार्ड मिलेगा। उन्होंने खुलासा किया था कि जब वह गृह मंत्रालय में कार्यरत थे, उस दौरान राजनीतिक दबाव के चलते इशरत जहां मामले में एक विशेष नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की गई थी। पढ़ें पूरी खबर...

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RVS Mani

आरवीएस मणि (फोटो- ANI)

भारत सरकार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा की थी। कुल 131 नागरिकों को पद्म अवार्ड दिया जाएगा। इनमें से एक नाम गृह मंत्रालय के पूर्व अधिकारी RVS मणि का भी है। मणि ने इशरत जहां एनकाउंटर मामले में महत्वपूर्ण खुलासे किए थे।

दो विरोधी हलफनामे कोर्ट में दायर किए गए

पद्म श्री अवार्ड मिलने पर आरवीएस मणि ने मोदी सरकार का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान एक स्पष्ट संदेश देता है कि सरकारी सेवा में पेशेवर ईमानदारी सबसे जरूरी है। दरअसल, उन्होंने खुलासा किया था कि जब वह गृह मंत्रालय में कार्यरत थे, उस दौरान राजनीतिक दबाव में एक विशेष नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की गई थी। उन्होंने कहा था कि साल 2009 में UPA कार्यकाल के दौरान उनके हस्ताक्षर से दो विरोधाभासी हलफमाने कोर्ट में दायर किए गए थे। दोनों हलफनामे इशरत जहां एनकाउंटर मामले से जुड़े थे।

पहले हलफनामे में इशरत को बताया गया आतंकी

उन्होंने कहा कि पहले पहले हलफनामे में केंद्रीय खुफिया एजेंसियों द्वारा सटीक इनपुट के आधार पर इशरत जहां को आतंकी बताया गया था। वह लश्कर ए तयैबा के एक मॉड्यूल का हिस्सा थी। जिसका मकसद भारत में हाई प्रोफाइल राजनीतिक हस्तियों की हत्या करना था। जबकि, बाद के हलफनामे में खुफिया रिपोर्ट को नजरअंदाज कर दिया गया। साथ ही, केंद्र सरकार ने गुजरात सरकार की कार्रवाई से खुद को अलग कर लिया।

मणि ने दावा किया कि हलफनामा बदलने के लिए काफी राजनीतिक दवाब डाला गया। उन्होंने कहा कि पहला हलफनामा का मसौदा मैंने ही तैयार किया था। उन्होंने कहा कि वह हलफनामा खुफिया रिपोर्टों के आधार पर थी। उन्होंने उस रिपोर्ट को एकदम सही बताया।

रिपोर्ट में लश्कर के मॉड्यूल का जिक्र

मणि ने कहा कि उन्होंने जिन रिपोर्टों को देखा था उसमें चार सदस्यीय मॉड्यूल का जिक्र था। जिसमें इशरत जहां, जावेद शेख उर्फ ​​​​प्राणेश पिल्लई, जीशान जौहर और अमजद अली शामिल थे। इन सभी का एनकाउंटर 15 जून 2004 को हुआ था। मूल हलफनामे में लश्कर-ए-तैयबा के मुखपत्र 'गजवा टाइम्स' में किए गए दावे पर आधारित भारतीय मीडिया में छपे रिपोर्टों का हवाला दिया गया।

इसके मुताबिक जहां के बारे में पुलिस को पहले ही पता चल गया था। जबकि, बाद के हलफनामे में गृहमंत्रालय के तरफ से कहा गया कि सभी खुफिया इनपुट निर्णायक सबूत नहीं होते हैं और ऐसे इनपुट पर कार्रवाई करना राज्य सरकार और राज्य पुलिस का काम है। गृहमंत्रालय की तरफ से यह कहा गया कि केंद्र का ऐसी कार्रवाई से किसी भी तरह से कोई लेना-देना नहीं है और वह किसी भी अनुचित या अत्यधिक कार्रवाई का समर्थन नहीं करता है।

दूसरे हलफनामे में केंद्र ने खुद को किया कार्रवाई से अलग

जबकि पहले हलफनामे में कहा गया था कि यह मामला CBI जांच के लिए उपयुक्त नहीं है, दूसरे में कहा गया कि केंद्र एक स्वतंत्र जांच या CBI जांच पर आपत्ति नहीं करेगा। मणि ने बाद में कहा था कि दूसरा हलफनामा उनके द्वारा तैयार नहीं किया गया था और उन्होंने आदेश के तहत उस पर हस्ताक्षर करके उसे दायर किया था। 2016 में तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में एक बयान में कहा था कि दूसरा हलफनामा (2009 में) तत्कालीन अटॉर्नी जनरल ने जांचा था और तत्कालीन गृह मंत्री (पी चिदंबरम) ने उसे मंजूरी दी थी।

हेडली ने भी किया था इशरत जहां का जिक्र

वहीं, भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने एक बयान में 26/11 के आरोपी डेविड कोलमैन हेडली की गवाही का भी जिक्र किया। इसमें इशरत जहां को एक महिला आतंकी करार दिया गया। जो पुलिस संग मुठभेड़ में मारी गई। बता दें कि बाद के समय में मणि ने आतंकवाद की जांच में राजनीतिक दखलअंदाजी के मुख्य विषय पर कई किताबें लिखी हैं, जिनमें 'द मिथ ऑफ़ हिंदू टेरर: इनसाइडर अकाउंट ऑफ़ मिनिस्ट्री ऑफ़ होम अफेयर्स' और 'डिसेप्शन: ए फैमिली दैट डिसीव्ड द होल नेशन' शामिल हैं।