
दिल्ली के मोतीबाग पेट्रोल पंप का नजारा । ( फोटो: ANI)
Fuel Crisis : महज 14 दिनों के दौरान पेट्रोल और डीजल के दामों में हुए चौथे इजाफे ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। सोमवार को देश के रांची, लखनऊ और पटना जैसे शहरों में लोगों ने इस बढ़ते आर्थिक बोझ को लेकर अपना कड़ा रोष जाहिर किया। जनता का साफ कहना है कि तेल के दाम इसी तरह बढ़ते रहे तो ईंधन संकट और महंगाई चरम पर पहुंच जाएंगे, जिससे घर का बजट पूरी तरह से पटरी से उतर जाएगा। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इससे सिर्फ सफर करना ही महंगा नहीं होगा, बल्कि माल ढुलाई का खर्च बढ़ने से अनाज, सब्जियां और रोजमर्रा की जरूरी चीजें भी आम इंसान की पहुंच से बाहर हो जाएंगी। जनता के सुर में सुर मिलाते हुए विपक्ष ने भी सरकार पर तीखा प्रहार किया है।
रांची में आम यात्रियों ने शिकायत की है कि तेल की कीमतों का सीधा असर घर के हर छोटे-बड़े खर्च पर पड़ रहा है। अब्दुल जलील अंसारी ने बातचीत में अपना दर्द बयां करते हुए कहा, 'इसका असर बहुत व्यापक है। टमाटर पहले से ही लाल हो रखे हैं, अब तेल महंगा होने से आलू-प्याज से लेकर आटा-चावल तक की कीमतें आसमान छू रही हैं। सरकार गूंगी-बहरी हो गई है, उन्हें परवाह नहीं है कि लोग भूख से मर रहे हैं। जब काम का वक्त आता है तो वे लंदन-पेरिस चले जाते हैं।'
एक अन्य स्थानीय नागरिक अनिल कुमार ने बताया कि दो दिन पहले जो पेट्रोल 102 रुपये था, वह अब 105 रुपये हो गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगाई कि वे अन्य देशों से बात करके तेल सस्ता करवाएं ताकि निम्न आय वर्ग को राहत मिल सके। परमानंद सिंह ने भी सरकार से इस बढ़ोतरी को जनहित में तुरंत वापस लेने की मांग की है।
लखनऊ में भी आम आदमी इस मार से कराह रहा है। एक दैनिक यात्री ने चिंता जताते हुए कहा कि पेट्रोल 101 रुपये के पार जा चुका है और बेरोजगारी के इस दौर में कहीं भी आना-जाना बहुत मुश्किल हो गया है। एक अन्य खरीदार ने पेट्रोल के दामों की तुलना डॉलर की उछाल से करते हुए कहा, 'ऐसा लगता है डॉलर और पेट्रोल के बीच रेस लगी है। देश को बड़े आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए हमें अभी से बचत शुरू कर देनी चाहिए।' एक अन्य व्यक्ति ने समझाया कि तेल महंगा होने का मतलब है कि हर उत्पाद और ट्रांसपोर्ट पर इसका 'श्रृंखलाबद्ध प्रभाव' पड़ेगा और हर चीज महंगी हो जाएगी।
पटना के उपभोक्ताओं की भी यही व्यथा है। एमडी हदीस का कहना है कि महज दो हफ्ते में तेल के चार बार दाम बढ़ चुके हैं, जिससे अब निजी वाहन छोड़ पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सहारा लेना ही एकमात्र विकल्प बचा है। रवि पाठक ने कहा कि महंगाई का असर दिखने लगा है और अगर यही हाल रहा तो भविष्य में साइकिल का इस्तेमाल करना होगा या पैदल चलना पड़ेगा। विश्वजीत कुमार ने बताया कि इतने कम समय में बार-बार दाम बढ़ने से मासिक घरेलू बजट बुरी तरह चरमरा गया है।
ध्यान रहे कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव (खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के पास संभावित आपूर्ति बाधाओं की आशंका) और वैश्विक कच्चे तेल बाजार में अस्थिरता के चलते सोमवार को तेल विपणन कंपनियों ने यह ताजा बढ़ोतरी की है। मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव भी इसका एक बड़ा कारण है। पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में इस लगातार वृद्धि से रसद और ट्रांसपोर्ट का खर्च और बढ़ना तय है, जिससे आने वाले दिनों में खुदरा महंगाई दर पर सीधा और गंभीर असर पड़ेगा। ( इनपुट : ANI)
Published on:
25 May 2026 12:47 pm
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