
गेट एनालिसिस क्या है और यह कैसे काम करता है? (AI जनरेटेड फोटो)
Ketan Agarwal Murder Case: पुणे के कारोबारी केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में अब गेट एनालिसिस नाम की फॉरेंसिक तकनीक चर्चा में है। जांच अधिकारियों का मानना है कि जब चेहरे की पहचान, मोबाइल लोकेशन और दूसरे पारंपरिक तरीके काम नहीं आते तब किसी व्यक्ति के चलने का तरीका भी उसकी पहचान करने में अहम भूमिका निभा सकता है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में आरोपियों ने पहचान छिपाने और डिजिटल सुराग खत्म करने की कोशिश की थी। ऐसे में गेट एनालिसिस जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
गेट एनालिसिस ऐसी फॉरेंसिक तकनीक है जिसमें किसी व्यक्ति के चलने के तरीके का अध्ययन किया जाता है। इसमें कदमों की लंबाई, चलने की रफ्तार, शरीर का संतुलन, हाथों की हरकत, पैरों की स्थिति और शरीर की गतिविधियों जैसे कई पहलुओं का विश्लेषण किया जाता है। इसके बाद इन जानकारियों की तुलना CCTV फुटेज और संदिग्ध व्यक्ति की रिकॉर्ड की गई चाल से की जाती है। अगर दोनों का पैटर्न मेल खाता है तो यह जांच में अहम सहायक सबूत बन सकता है।
संभल के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई का कहना है कि इस मामले में आरोपी ने जानबूझकर ऐसे सुराग नहीं छोड़े जिनसे उसकी पहचान आसानी से हो सके।
उन्होंने कहा चेहरे की पहचान और मोबाइल लोकेशन जैसे पारंपरिक तरीके इस मामले में ज्यादा मददगार नहीं हैं। ऐसे मामलों में गेट पैटर्न एनालिसिस सबसे मजबूत फॉरेंसिक तकनीकों में से एक है। हर व्यक्ति के चलने का तरीका अलग होता है और उसी के आधार पर उसकी पहचान की जा सकती है।
बिश्नोई के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आने के बाद गेट एनालिसिस पहले से ज्यादा सटीक हो गया है। पहले फॉरेंसिक विशेषज्ञ CCTV फुटेज को फ्रेम-दर-फ्रेम देखकर चाल का विश्लेषण करते थे। इसमें काफी समय लगता था। अब AI आधारित कंप्यूटर विजन सिस्टम अपने आप कदमों की गति, शरीर की मुद्रा और दूसरी बायोमेट्रिक विशेषताओं का विश्लेषण कर व्यक्ति का अलग गेट प्रोफाइल तैयार कर सकते हैं।
यह तकनीक भारत के कई चर्चित मामलों में इस्तेमाल हो चुकी है। सबसे चर्चित उदाहरण 2017 में पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता गौरी लंकेश की हत्या का मामला है।
उस समय हमलावर ने हेलमेट पहन रखा था इसलिए उसकी पहचान चेहरे से नहीं हो सकी। बाद में आरोपी परशुराम वाघमोरे की गिरफ्तारी के बाद कर्नाटक एसआईटी ने घटनास्थल को दोबारा तैयार किया और उससे वैसी ही वेशभूषा पहनाकर चलवाया जैसी CCTV फुटेज में दिखाई दी थी। इसके बाद फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने उसकी चाल की तुलना CCTV फुटेज से की। यह जांच में अहम सहायक सबूत बना।
मुंबई के चर्चित 2021 साकीनाका रेप और मर्डर केस की जांच में भी गेट एनालिसिस का इस्तेमाल किया गया था। इससे यह साफ होता है कि ऐसे मामलों में, जहां आरोपी अपनी पहचान छिपाने की कोशिश करते हैं यह तकनीक जांच एजेंसियों के लिए लगातार अहम होती जा रही है।
फॉरेंसिक विशेषज्ञों का कहना है कि गेट एनालिसिस को अकेले निर्णायक सबूत नहीं माना जाता। इसका इस्तेमाल CCTV फुटेज, फॉरेंसिक जांच, गवाहों के बयान और दूसरे वैज्ञानिक सबूतों के साथ मिलाकर किया जाता है।
हालांकि, जैसे-जैसे अपराधी मास्क पहनने, मोबाइल फोन साथ न रखने और डिजिटल निशान मिटाने जैसी कोशिशें कर रहे हैं वैसे-वैसे जांच एजेंसियां भी गेट एनालिसिस जैसी आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों पर ज्यादा भरोसा करने लगी हैं।
Updated on:
01 Jul 2026 07:54 pm
Published on:
01 Jul 2026 07:52 pm
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