
केतन अग्रवाल और सिया गोयल। (Photo: Social Media | Edited by ChatGPT)
Ketan Agarwal Murder Case: पुणे के कारोबारी केतन अग्रवाल हत्याकांड में पुणे ग्रामीण पुलिस अब अदालत में चार्जशीट दाखिल करने से पहले बहुत ज्यादा सावधानी बरत रही है। इस मामले में केतन की मंगेतर सिया गोयल मुख्य आरोपी है। वहीं, पुलिस सिया के कथित प्रेमी चेतन चौधरी की भूमिका की भी जांच कर रही है। चूंकि इस केस में कोई चश्मदीद गवाह या सीधे तौर पर हत्या का कोई वीडियो फुटेज नहीं है इसलिए पुलिस पूरी तरह डिजिटल और फॉरेंसिक सबूतों के सहारे ऐसी चार्जशीट तैयार करने में जुटी है जो अदालत की कानूनी जांच में भी टिक सके।
महाराष्ट्र पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, पुणे पुलिस इस बार सोनम रघुवंशी मामले जैसी कानूनी कमियों और कागजी प्रक्रियाओं की गलतियों से बचना चाहती है। जांच अधिकारियों के अनुसार, उस हाई-प्रोफाइल मामले में गिरफ्तारी के आधार सही तरीके से नहीं बताए गए थे। इसके अलावा सरकारी दस्तावेजों में भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों का उल्लेख करने में भी प्रक्रिया संबंधी गलतियां हुई थीं।
इन कमियों का फायदा बचाव पक्ष को मिला और आरोपी को जमानत मिल गई, जिसे बाद में हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, अदालतें केवल सबूत ही नहीं बल्कि कानूनी प्रक्रिया को भी देखती हैं। ऐसे में छोटी-सी प्रक्रिया संबंधी गलती भी बचाव पक्ष के लिए बड़ा हथियार बन सकती है।
पुलिस का कहना है कि इस जांच में सबसे बड़ी चुनौती मजबूत कानूनी सबूत जुटाना है। लोहगढ़ किले की पहाड़ी से केतन अग्रवाल को नीचे धकेले जाते हुए देखने वाला कोई चश्मदीद गवाह नहीं है और न ही इस पूरी घटना का कोई सीसीटीवी फुटेज मौजूद है। पुलिस को जो फुटेज मिला है, उसमें सह-आरोपी चेतन चौधरी केवल घटनास्थल के पास हुडी पहने हुए दिखाई दे रहा है लेकिन इससे हत्या साबित नहीं होती।
पुलिस ने पुतले (डमी) के जरिए घटनास्थल पर पूरी घटना को दोबारा रीक्रिएट किया है। हालांकि जांच अधिकारियों का कहना है कि इससे वैज्ञानिक रूप से यह साबित नहीं किया जा सकता कि केतन को जानबूझकर धक्का दिया गया था या उनका पैर फिसल गया था। पुतले के गिरने का तरीका उसके वजन, एंगल और गति पर भी निर्भर करता है। यही वजह है कि पुलिस इस पूरे मामले को परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर आगे बढ़ा रही है।
इस कानूनी चुनौती से निपटने के लिए पुलिस अब मुख्य आरोपी सिया गोयल का पॉलीग्राफ (लाई डिटेक्टर) टेस्ट कराने की अनुमति मांग रही है। अधिकारियों ने साफ किया है कि भारतीय कानून के तहत इस टेस्ट की रिपोर्ट अदालत में सीधे सबूत के तौर पर मान्य नहीं होती। पुलिस का मकसद इसे सबूत बनाना नहीं, बल्कि इसके जरिए नए सुराग हासिल करना है।
अगर पूछताछ के दौरान सिया अनजाने में भी किसी ऑनलाइन सर्च, योजना या डिजिटल गतिविधि से जुड़ी कोई जानकारी देती है, तो पुलिस उसके मोबाइल डेटा, ब्राउजर हिस्ट्री, डिलीट किए गए सर्च और लोकेशन रिकॉर्ड की अलग से जांच कर उन तथ्यों की पुष्टि करने की कोशिश करेगी।
पुलिस का दावा है कि सिया केतन से शादी नहीं करना चाहती थी। इसी वजह से उसने चेतन चौधरी के साथ मिलकर हत्या की कथित साजिश रची। जांच एजेंसी अब मोबाइल डेटा, इंटरनेट सर्च हिस्ट्री, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और दूसरे डिजिटल सबूतों के जरिए इस दावे को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
Published on:
01 Jul 2026 06:36 pm
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