
Gold Bond: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bond) को लेकर एक महत्वपूर्ण घोषणा की है, जिससे निवेशकों को डबल से भी ज्यादा मुनाफा मिलने की संभावना है। इस घोषणा ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को एक आकर्षक निवेश विकल्प बना दिया है, जो कि पारंपरिक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और पोस्ट ऑफिस स्कीम्स की तुलना में बेहतर रिटर्न प्रदान कर सकता है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम के तहत निवेशकों को पहली सीरीज पर तगड़ा रिटर्न मिला है। इसमें निवेशकों के पैसे डबल हो गए हैं।
यदि आपने 8 साल पहले सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) की पहली ट्रांच में निवेश किया था, तो आपके लिए यह वास्तव में बहुत बड़ी खुशखबरी है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 5 अगस्त 2016 को जारी किए गए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की मैच्योरिटी पर फाइनल रिडेम्प्शन प्राइस 6,938 रुपए प्रति ग्राम के हिसाब से तय किया है। बता दें कि अगस्त 2016 में इसे 3,119 रुपए प्रति ग्राम के भाव पर जारी किया गया था।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए यह एक और महत्वपूर्ण लाभ है। निवेशकों को 2.5% की वार्षिक ब्याज दर का फायदा भी मिल रहा है। यह ब्याज दर सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की मूलधन राशि पर दी जाती है और इसे हर छह महीने में (सेमी-एनुअल) निवेशकों के खाते में ट्रांसफर किया जाता है।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bond, SGB) स्कीम भारत सरकार द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के माध्यम से जारी की जाने वाली एक निवेश योजना है। यह योजना निवेशकों को भौतिक सोना (Physical Gold) खरीदने की बजाय, गोल्ड बॉन्ड के रूप में निवेश करने का अवसर प्रदान करती है। इस स्कीम का उद्देश्य सोने की मांग को कम करना, निवेशकों को एक सुरक्षित और लाभदायक निवेश विकल्प प्रदान करना, और साथ ही देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) को सुरक्षित रखना है।
सुरक्षा: भौतिक सोने की तरह इसे चोरी या नुकसान होने का खतरा नहीं है।
ब्याज के साथ पूंजी लाभ: निवेशकों को सोने की कीमत बढ़ने का फायदा मिलता है, साथ ही उन्हें ब्याज भी मिलता है।
टैक्स लाभ: मैच्योरिटी पर मिलने वाले पूंजीगत लाभ पर टैक्स नहीं लगता।
इसे बैंक, पोस्ट ऑफिस, स्टॉक एक्सचेंजों (NSE/BSE), और निर्धारित एजेंटों के माध्यम से खरीदा जा सकता है। ऑनलाइन माध्यम से खरीदारी करने पर प्राइस में थोड़ी छूट भी मिलती है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की अवधि 8 साल होती है, लेकिन 5 साल के बाद निवेशक इसे प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन (Premature Redemption) के तहत वापस ले सकते हैं।
Published on:
06 Aug 2024 10:16 am
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